पं० सुमित्रानन्दन पन्त की जन्मतिथि पर सारस्वत आयोजन

  • पन्त प्रकृति का मातृरूप में दर्शन करते हैं”

सर्जनशील रचनाकारों के वैचारिक मंच ‘वैचारिकी’ के तत्त्वावधान में प्रकृति के सुकुमार कवि पं० सुमित्रा नन्दन पन्त की जन्मतिथि (२० मई)-समारोह का आयोजन अल्लापुर में किया गया। समारोह दो चरणों में आयोजित था– प्रथम पन्त पर संगोष्ठी और द्वितीय, कवि-सम्मेलन।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए भाषाविद् डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का मन्तव्य था, “कल्पना के साथ सुमधुर कोमलता भी पन्त के काव्य में आरम्भ से ही संलक्षित होती है। पन्त प्रकृति का मातृरूप में दर्शन करते हैं और स्वयं एक बालिका के रूप में उपस्थित होते हैं। प्राकृतिक विपणन में एक अतीन्द्रिय कोमलता, एक रहस्यमयी सूक्ष्म शक्ति तथा एक ममतामयी माँ के साथ उनका प्रत्यक्षीकरण होता है। प्रकृति के प्रति विस्मय-भाव का सम्यक् चित्र पन्त के काव्य में ही उभरता है।”
शिक्षाशास्त्री प्रो० राम किशोर शर्मा ने बताया, “पन्त जी ने प्रकृति के सौन्दर्य तथा मानवीय सम्बन्धों के विविध सूक्ष्म सन्दर्भों को अपने काल में अवतरित किया है। कल्पना-सदृश वैभव अन्य किसी कवि में नहीं है।”
इससे पूर्व दीप-प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया गया। विशिष्ट अतिथि शिवराम उपाध्याय ‘मुकुल मतवाला’ ने माँ सरस्वती का काव्यात्मक स्मरण किया।
कहानीकार कैलाशनाथ पाण्डेय का मत था,” उन्नत घुँघराले केशविन्यास वाले पन्त जी इलाहाबाद की साहित्यिक विभूति तो थे ही, हिन्दीकाव्य-साहित्य के अन्तर्गत छायावाद के एक सुदृढ़ स्तम्भ थे।”

समाजशास्त्री और संयोजक डॉ० रवि मिश्र ने कहा,” पन्त ने स्थूल के प्रति सूक्ष्म की परिभाषा करते हुए प्रकृति का सम्यक् श्रृंगार किया था।”

कविसम्मेलन के अन्तर्गत मुख्य अतिथि शायर तलब जौनपुरी ने पढ़ा, “भारत की भूमि की यही ख़ूबी है लाजवाब। जिस शै पर दृष्टि पड़ती है लगती है लाजवाब।। ” संचालक डॉ० प्रदीप चित्रांशी ने सुनाया, “अरे! मृत्यु क्यों बैठी हो तुम,आओ गले लगाओ न। प्यार करो मुझसे साथी बन, और मुझे तरसाओ न।।

सरिता मिश्र ने सुनाया, “देखो न माँ दूर देश से गुनगुन चिड़िया आई है, मैं भी उछलूँ दूर गगन में नया सवेरा लायी है।” डॉ० वीरेन्द्र तिवारी ने सुनाया, “आग होती नहीं सिर्फ़ जलाने के लिए। करें प्रयोग कभी बर्फ़ गलाने के लिए।।”
इनके अतिरिक्त ईश्वरशरण शुक्ल, अरविन्द कुमार सिनहा, केशव सक्सेना, ब्रजलाल द्विवेदी, शिवराम गुप्त, विवेक सत्यांशु, के०पी०गिरि, उमेश श्रीवास्तव, नज़र इलाहाबादी आदि ने काव्यात्मक रचना का पाठ किया