प्रयागराज। २४ सितम्बर को सलोरी, प्रयागराज मे ‘हिन्दी-संसार’ शिक्षण-संस्था के सभागार मे ‘हम हिन्दी हैँ ‘ नामक हिन्दी सारस्वत शिखर- समारोह– २०२६ मे हिन्दी के वैशिष्ट्य को बहुविध रेखांकित किया गया। इस समारोह मे शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, पत्रकारिता, श्रव्य-दृश्य-माध्यम मे हिन्दी का विस्तार कितना और कहाँ तक किया गया है, इसपर विषय-विशेषज्ञोँ ने बहुविध अपना-अपना विचार व्यक्त किया था। इससे पूर्व समारोह-अध्यक्ष ने दीप-प्रज्वलन कर समारोह का उद्घाटन किया था। डॉ० लोकेश शुक्ल ने सरस्वती-वन्दना की। समीक्षा सेठ ने गुरु-स्तुति की। स्मिता चौधरी ने स्वागत-गीत प्रस्तुत किया।
प्रारम्भ मे समारोह अध्यक्ष व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय को अंगवस्त्र, स्मृतिचिह्न, दैनन्दिनी, लेखनी तथा बैग भेँटकर अभिनन्दन किया गया।
इस आयोजन मे आकाशवाणी, प्रयागराज की सहायक निदेशक (कार्यक्रम) नेहा गुप्ता को ‘हिन्दीवागीश्वरी शिखर-सम्मान’, वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र को ‘हिन्दीसम्पादनकौशल शिखर-सम्मान’, आकाशवाणी और दूरदर्शन के क्रमश: पूर्व-सहायक निदेशक (कार्यक्रम) और प्रमुख कार्यक्रम-अधिकारी डॉ० लोकेशकुमार शुक्ल को ‘हिन्दीवागर्थ शिखर सम्मान’, साहित्यकार श्रीप्रकाश मिश्र को हिन्दीसाहित्यवैभव शिखर-सम्मान, प्रो० सरोज सिंह को ‘हिन्दीशिक्षण शिखर-सम्मान’ तथा लेखक-प्रवक्ता डॉ० अशोक स्वामी को ‘हिन्दी सारस्वत शिखर-सम्मान’ से आभूषित किया गया, जिसके अन्तर्गत पगड़ी, शॉल, डायरी-लेखनी, सम्मानपत्र, स्मृतिचिह्न तथा बैग शामिल थे।
विचार-शृंखला के अन्तर्गत नेहा गुप्ता ने आकाशवाणी के कार्यक्रमो मे हिन्दी-संस्कार को समझाते हुए कहा– समाचार सुनना है; हिन्दी, संस्कृत, उर्दू सीखनी हो, तो आकाशवाणी सुनिए; क्योँकि उनमे भाषा की शुद्धता होती है और एक आकर्षक शैली होती है। हम हिन्दीभाषा को रटते हैँ; बोलते हैँ और सुनते हैँ; क्योँकि उसमे जीवन का मर्म होता है।
मुनेश्वर मिश्र ने कहा– हिन्दी-पत्रकारिता को व्याकरण की दृष्टि समझना आसान नहीँ होता; क्योँकि उसमे मात्रा के हेर-फेर से अनर्थ हो जाता है।
डॉ० लोकेश कुमार शुक्ल ने कहा– आकाशवाणी हिन्दीभाषा की बारीक़ियोँ को लेकर पहले ही की तरह दृढ़निश्चय बना हुआ है, जबकि दूरदर्शन की स्थिति विपरीत दिखती है। भाषा-समृद्धि की दृष्टि से दूरदर्शन की तुलना मे आकाशवाणी बेहतर है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने बताया– हमारी छात्र-छात्राओँ को मार्ग पर चलते हुए, अपनी दृष्टि ‘पथ’ पर केन्द्रित करनी होगी, जोकि उनका गन्तव्य होता है। इसी अवसर पर आचार्य ने अपने वक्तव्य मे प्रयुक्त शब्दोँ को शुद्ध करते हुए समझाया। उन्होँने मात्रात्मक ज्ञान भी कराया। इसके लिए उन्होँने बताया कि असफलता अशुद्ध है, जबकि विफलता शुद्ध है। जीवन मे सुखद परिणाम पाने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता अनिवार्य हो जाती है।
शिक्षक एवं लेखक अशोक स्वामी ने कहा– आज हिन्दी की उपयोगिता बहुत बढ़ गयी है। उसके कारण हिन्दी के क्षेत्र मे रोज़गार की सम्भावना क़दम-क़दम पर दिख रही हैँ।
साहित्यशिल्पी एवं समीक्षक श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा– साहित्य भाषा मे लिखा जाता है और साहित्य का निर्माण भाषा से है।
चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय मे हिन्दीविभागाध्यक्ष प्रो० सरोज सिंह ने कहा– शिक्षा जीवन और भविष्य को उन्नत करती है। हिन्दी मे शिक्षणकार्य करने के लिए बहुत सारे रास्ते खुले हुए हैँ।
इसी अवसर पर बड़ी संख्या मे विविध अध्यापन-परीक्षाओँ मे विशिष्ट उपलब्धि अर्जित करनेवाली छात्र-छात्राओँ उर्वशी, संगीता, कविता, प्रीति इत्यादि को पारितोषिक के अन्तर्गत शॉल, डायरी-लेखनी, प्रमाणपत्र तथा दीवार घड़ी प्रदान की गयी।
समारोह का संचालन विजय यादव और वैष्णवी मिश्र ने किया। आभार-ज्ञापन डॉ० अशोक स्वामी ने किया।
समारोह मे प्रभाकर पाण्डेय, पंकज मिश्र, ब्रजकिशोर, महेन्द्र स्वामी,अमित, दुर्गेश, लक्ष्य, भँवरनाथ, कविता, मंजेश्वरी, अंजु, रजनीश, नेहा, रोशनी, संतोष अत्रे, अनिरुद्ध इत्यादिक उपस्थित थे।