काया सुवासित सा मलय है

मीन जैसे नयन चंचल, काया सुवासित सा मलय है।
तुम उर्वशी या मेनका हो, भृकुटी चन्दा सा वलय है।
पूनम का तुम चाँद प्रिये हो, हंसिनी सी चाल तेरी।
छाँव आँचल की तुम्हारे, विश्रान्त मन का निलय है।

अधरों पर मधुमास ठहरा, वाणी में कोयल की तान है।
केश-राशि घनघोर सावन, रूप तेरा ऋतु-विधान है।
मंद-मंद मुस्कान तेरी, जैसे उषा की प्रथम लाली।
तेरे स्पर्श की कल्पना में, धड़कन भी मधुरिम गान है।

चरण पड़े जिस राह पर तेरे, फूल स्वयं मुस्काते हैं।
तेरी आहट सुनकर जैसे, पावन गीत बन जाते हैं।
तुम हो तो हर साँझ सुहानी, तुम हो तो हर भोर सुनहरी।
तुम बिन सूने नयन हमारे, तुमसे ही सपने सजते हैं।

तुम सरिता की निर्मल धारा, तुम वीणा की मधुर झंकार।
तुम मंदिर की दीपशिखा हो, तुम ही मन का प्रथम प्यार।
जन्म-जन्म की प्यास बुझाए, ऐसा तेरा साथ मिले।
तुम संग जीवन हो कविता-सा, तुम बिन ये जग निराधार।