कहानी ढोंगी बाबा का पार्ट 5 : रूहानी फकीर बाबा
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– एक रात गाँव के रामदीन की पंद्रह साल की बेटी चंपा मजार पर अपनी माँ के साथ गई। माँ ने चादर चढ़ाई। चंपा बाहर खड़ी रही। शरीफ ने उसे देखा। “नाम […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– एक रात गाँव के रामदीन की पंद्रह साल की बेटी चंपा मजार पर अपनी माँ के साथ गई। माँ ने चादर चढ़ाई। चंपा बाहर खड़ी रही। शरीफ ने उसे देखा। “नाम […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– रघुवीर ने काँपते हुए जमील की ओर देखा। “इसका मतलब?” जमील ने मजार की तरफ देखा। “मतलब यह कि शरीफ फकीर कभी था ही नहीं।” उसी समय गाँव के दूसरी तरफ […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– अगली सुबह कल्लूपुर में एक और खबर फैली। गाँव के मास्टर रघुवीर की बेटी नीलम रात से गायब थी। रघुवीर के घर में कोहराम मचा था। नीलम उन्नीस साल की थी। […]
आदित्य त्रिपाठी (सहा० अध्यापक, प्रा० वि० प्रतापपुर, कोथावाँ)– अनिल और राज नगवा गाँव की मिट्टी में एक साथ ही घिसलकर बड़े हुए थे। दोनो मे गहरी दोस्ती थी। बचपन से एक ही थाली में खाते […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वटवृक्ष के नीचे होने वाली मौन-साधना ने गाँव के जीवन को केवल सामाजिक नहीं, दार्शनिक आयाम भी प्रदान कर दिया था। अब प्रश्न केवल व्यवहार के नहीं रहे; वे अस्तित्व के […]
राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’, कहानीकार संगीता की ससुराल में सब अमन चैन था । खाता पीता परिवार था। समाज मे अच्छी इज्जत थी। उसके ससुर जीतमल जी गाँव के सबसे अमीर आदमी थे। गाँव वाले […]
राजा को जनता पर संदेह हुआ। वह बोले मैंने इन्हें सब कुछ दे दिया फिर भी भूखमरी । आखिर क्या वजह है। उन्होंने पुरोहित जी को बुलाकर पूरी समस्या बताई। पुरोहित जी ने राजा को […]