इस समाज की नीवँ धर्म है
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ हिंसक पशु कब समझा है, कोमल मन के भाव मधुर । बिना दण्ड कब सुधरे हैं, वामी, कामी और दुष्ट असुर । इस समाज की नीवँ धर्म है, यह हर प्राणी […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’ हिंसक पशु कब समझा है, कोमल मन के भाव मधुर । बिना दण्ड कब सुधरे हैं, वामी, कामी और दुष्ट असुर । इस समाज की नीवँ धर्म है, यह हर प्राणी […]