आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

July 29, 2022 0

यह पूरी पारदर्शी प्रतिक्रिया नीचे दिखाये गये प्रचारपत्र मे प्रयुक्त शब्दों और विराम-विरामेतर (‘विरामेत्तर’ अशुद्ध है।) चिह्नो के संदर्भ मे की गयी है। यह पढ़े-लिखे लोग का ‘विश्व हिन्दी संगठन’ है; परन्तु भाषाबोध के नाम […]

‘डी० लिट्०’ करने के लिए ‘अनन्य’ विषय

October 29, 2021 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला हमारे विद्यार्थी और अध्यापक-अध्यापिका वृन्द ‘डी० लिट्०’ (डि. लिट., डि. लिट्., डि० लिट०, डि० लिट्०, डी. लिट., डी. लिट्. तथा डी० लिट० अशुद्ध हैं।) उपाधि अर्जित (यहाँ ‘प्राप्त करने’ […]

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला

September 17, 2021 0

प्रश्न– आपको अधोलिखित शब्दों में से जो शब्द/ शब्दप्रयोग अशुद्ध लगते हों, उन्हें शुद्ध करते हुए लिखें—१- समन्दर२- जीवन में सुख और दुख दोनों है।३- पाठ्येत्तर और शिक्षणेतर४- ऋषि पातंजली एवंम् पाणिनि५- उसके साँसों/श्वास में […]

‘स्वतन्त्र’ हिन्दी-व्याकरणलेखन की आवश्यकता

November 26, 2020 0

—- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय हमारे हिन्दीशब्दकोशकारवृन्द ने हिन्दीशब्दकोश के नाम पर उसे ‘कबाड़ख़ाना’ बनाया है। इसका मुख्य कारण है कि उन्होंने उद्देश्यपरक कोश तैयार नहीं किये हैं। उद्देश्यपरक का प्रश्न इसलिए कि कौन-सा शब्द […]

हिन्दीभाषा का ‘स्वतन्त्र’ व्याकरणलेखन अपरिहार्य

November 27, 2019 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- हमारे हिन्दीशब्दकोशकारगण ने हिन्दीशब्दकोश के नाम पर ‘कबाड़ख़ाना’ बनाया है। इसका मुख्य कारण है कि उन्होंने उद्देश्यपरक कोश तैयार नहीं किये हैं। उद्देश्यपरक का प्रश्न इसलिए कि कौन-सा शब्द देशज/देसज है; तद्भव […]