मौन हृदय की पीड़ाओं का जटिल व्याकरण बहुत सरल है
मौन हृदय की पीड़ाओं का जटिल व्याकरण बहुत सरल है;भूखे मन को पढ़नेवाली केवल एक अकेली अम्मा । हाथ में मेंहँदी पाँव महावर,डोली अरमानों की आई।हर रिश्ते का धर्म निभाती,चाची, बहू कभी भौजाई।। विग्रह का […]
मौन हृदय की पीड़ाओं का जटिल व्याकरण बहुत सरल है;भूखे मन को पढ़नेवाली केवल एक अकेली अम्मा । हाथ में मेंहँदी पाँव महावर,डोली अरमानों की आई।हर रिश्ते का धर्म निभाती,चाची, बहू कभी भौजाई।। विग्रह का […]
शोकपूर्ण अभिव्यक्ति :———— डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- मनसा-वाचा-कर्मणा, सौ में शून्य पाय। बटन दबाना सोचकर, जाये मुँह की खाय।। बात मन की बिसर गया, तन में खोजे प्रीत। क़िला हवा में बन रहा, बालू की है […]