आठवेँ और अन्तिम अष्टनायक तीर्थराज प्रयाग की अनिर्वचनीय गौरवगाथा

February 27, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• एक कथा है, जिसके आधार पर तीर्थराजप्रयाग को तीर्थोँ मे शीर्ष स्थान दिया गया है। वह कथा इसप्रकार है :–एक बार की बात है। ब्रह्मा ने सोचा कि पृथ्वीलोक मे […]

महाकुंभ : रामवती जैसी बहुओं को सलाम

January 30, 2025 0

ज्ञात हुआ है कि यह फ़िरोजाबाद की रामवती जी हैं जो अपनी 85 वर्षीया सास फूलकली जी को लेकर संगम की ओर जा रही हैं। अपनी सासू मां को पीठ पर बैठाए रामवती जी के […]

भारत की तस्वीर : बाबा और पोते का जीवन्त प्रेम

January 29, 2025 0

हम लोग जिस पीढ़ी के हैं उसमें पिता के सामने तमाम मजबूरियां रहती थी । वह चाहते हुए भी अपने बेटे को सबके सामने दुलार नहीं सकता था, प्यार नहीं कर सकता था। पूरे परिवार, […]

पापबुद्धि को ‘पुण्यबुद्धि’ की ओर ले जाता ‘तीर्थ’

January 15, 2025 0

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। हम जैसाकि जानते हैँ– तीर्थोँ का राजा प्रयाग कहलाता है, जिसके सहयोगी तीर्थ हैँ :– उज्जैन, हरिद्वार तथा नासिक, जहाँ कुम्भपर्व का आयोजन होता है।अब प्रश्न है, वास्तव […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– तीन

January 14, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• संक्रान्ति का अर्थ है, ‘एक स्थान से दूजे स्थान मे पहुँचना वा एक-दूसरे का मिलना ‘संक्रान्ति’ कहलाती है। ‘संक्रान्ति’ की व्युत्पत्ति पर विचार करेँ तो ज्ञात होता […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– दो

January 13, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज।•••••••••••••••••••••••••••••••••••••• इन दिनो प्रयागराज मे एक ऐसा उत्साह है; उमंग है तथा चहल-पहल है, जो अनिर्वचनीय है। जिज्ञासा, कुतूहल एवं उत्सुकता बाँधे नहीँ बँधती। एक प्रकार से आस्था […]

तीर्थराजप्रयाग-महाकुम्भदर्शन– एक

January 12, 2025 0

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय(वैयाकरण एवं भाषाविज्ञानी), प्रयागराज। तीर्थोँ का राजा प्रयागराज पलक-पाँवड़े बिछाये, देश-देशान्तर से आस्था, श्रद्धा, विश्वास एवं भक्ति का भाव लेकर आनेवाले समस्त तीर्थयात्रियोँ के स्वागत मे प्रतीक्षारत है। यह वही प्रयाग […]