आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश
मनुष्य को किसी भी स्थिति-परिस्थिति में धैर्य शिथिल करने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि ‘धैर्य’ से श्रेयस्कर (कल्याणकर) कोई मित्र नहीं होता; वही धर्म (कर्त्तव्य) के साथ (‘से’ का प्रयोग अशुद्ध है।) सम्बद्ध करने में […]