आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

मनुष्य को किसी भी स्थिति-परिस्थिति में धैर्य शिथिल करने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि ‘धैर्य’ से श्रेयस्कर (कल्याणकर) कोई मित्र नहीं होता; वही धर्म (कर्त्तव्य) के साथ (‘से’ का प्रयोग अशुद्ध है।) सम्बद्ध करने में अपना अदृश्य योगदान भी करता (‘देता’ अशुद्ध है।) है। मनसा-वाचा-कर्मणा प्रतिपाद्य (जिसे प्रमाणित किया जाये।) परिशुद्ध आचरण की सभ्यता मनुष्य के हृदय को निर्मल (विकाररहित) करती है।

सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ अगस्त, २०२१ ईसवी।)