आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय का संदेश
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••आपमे यदि प्रतिभा है; योग्यता है तथा संसार को जीतने की इच्छा (जिगीषा) है तो आप कभी परमुखापेक्षी न बने। आपका परम धर्म है, ‘केवल कर्म करते रहना’। आपकी धारणा होनी चाहिए– अभिलषित वस्तु मिलेगी […]