कलमी लोगों के दौर में नयी क़लम : वीणा-नरेन्द्र
‘सुनिए वह धमाका जो शब्द और आदमी की टक्कर से पैदा होता है…’ मैं कोई आलोचक नहीं, पर तबियत से कवि न होने के बावज़ूद समय मिलने पर आम तौर पर मैं कविताएं पढ़ता रहा […]
‘सुनिए वह धमाका जो शब्द और आदमी की टक्कर से पैदा होता है…’ मैं कोई आलोचक नहीं, पर तबियत से कवि न होने के बावज़ूद समय मिलने पर आम तौर पर मैं कविताएं पढ़ता रहा […]