‘दलित’ सम्बोधन समाज के लिए अपमानसूचक और महाघातक!

May 4, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय केन्द्र और राज्य की सरकारें स्वस्थ तन-मन से युक्त कुछ जाति-विशेष को ‘दलित’ कहकर अपमानित करती आ रही हैं और अफ़सोस! वे जातियाँ फूले नहीं समा रही हैं। इस ‘दलित’ शब्द को […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला – दो : आरम्भ-प्रारम्भ-समारम्भ

February 24, 2018 0

किसी भी कार्य की प्रथम अवस्था का अनुष्ठान अथवा सम्पादन ‘आरम्भ’ है। दूसरे शब्दों में— कोई भी कार्य जब पहली बार किया जाता है तब उसे ‘आरम्भ’ कहा जाता है। अब ‘आरम्भ’ शब्द-संरचना पर हम […]

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय की पाठशाला : एक

February 23, 2018 0

आरती :– यह स्त्रीलिंग शब्द है, जिसका अर्थ है, किसी मूर्ति के चारों ओर सामने से दीपक को घुमाना। आरती किसी व्यक्ति -विशेष की नहीं की जाती प्रत्युत देवि-देव-विशेष की जाती है | शुद्ध अर्थात् […]

भाषा-विमर्श : शब्द-अर्थ-प्रयोग पर व्याकरणाचार्य मौन क्यों ?

December 18, 2017 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय – शब्द-अर्थ-प्रयोग-विडम्बना :—- शोध का विषय है। आत्मा : ‘आत्मा’ को स्त्रीलिंग में प्रयोग किया जाता है। परमात्मा : ‘परमात्मा’ को पुल्लिंग (पुंलिंग) में प्रयोग किया जाता है। इस शब्द में भी […]