आप संसार को जीत सकते हैँ
आपमे यदि प्रतिभा, योग्यता, पात्रता, प्रतिबद्धता, संसार को जीतने की इच्छा (जिगीषा) और सामर्थ्य हो तो आप कभी परमुखापेक्षी (पराश्रित/परजीवी/परावलम्बी नहीँ हो सकते।आपका परम धर्म है, ‘केवल कर्म करते रहना’। आपकी धारणा होनी चाहिए– अभिलषित/अभीप्सित […]