गाँवों का जीवन झुलस रहा है
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- वास्तव में भारत गाँवों में ही बसता है। शान्ति, सहिष्णुता, अहिंसा, नैतिक मूल्य और संस्कृति का दर्शन गाँवों के अतिरिक्त और कहाँ होगा? अफ़सोस गाँव बदल गए हैं। अब गाँव में […]
राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- वास्तव में भारत गाँवों में ही बसता है। शान्ति, सहिष्णुता, अहिंसा, नैतिक मूल्य और संस्कृति का दर्शन गाँवों के अतिरिक्त और कहाँ होगा? अफ़सोस गाँव बदल गए हैं। अब गाँव में […]