मुझे इन्सान ही बना रहने दो तुम

May 6, 2022 0

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद उत्कृष्टता की थाह न है,मुझे इन्सान ही बना रहने दो तुम। घने जंगल के दरख़्त की तरह,मुझे अहर्निश खड़ा रहने दो तुम। जहाँ मन मे न हो गुमान कोई,हर मुश्किल में अड़ा रहने दो तुम। अहम की है […]