“फ़िराक़ की कृतियाँ संस्कृत-श्लोक की भावप्रवणता से प्रभावित दिखती हैँ”– प्रो० राहत अबरार
।प्रयागराज। एक ख़ूबसूरत एहसास का नाम है, फ़िराक़। ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई के साथ-साथ, समालोचना और इतिहास पर भी क़लम चलानेवाले रघुपति सहाय फ़िराक़ गोरखपुरी यदि ज़िन्दा हैँ तो अपनी शाइरी मे। ‘गुल-ए-नग़्मा’, ‘मश्अल’, ‘नग़्म-ए-साज़’, ‘गुलबाग़’, […]