“तुलसीदास ईश्वरीय सत्ता की आवश्यकता को गहराई से समझते थे”– डॉ० रागिनी अवस्थी
गोस्वामी तुलसीदास की ५२६वीं जन्मतिथि के अवसर पर ‘सर्जनपीठ’ की विशेष प्रस्तुति यदि कोई जनकवि है तो वह हैं, ‘तुलसीदास’। ‘वैराग्य संदीपनी’, ‘श्री रामचरितमानस’, ‘विनयपत्रिका’, ‘गीतावली’, ‘कृष्णगीतावली’, ‘कवितावली’, ‘सतसई’, ‘दोहावली’, ‘रामाज्ञाप्रश्न’, ‘जानकीमंगल’, ‘पार्वतीमंगल’, ‘ ‘रामललानहछू’, […]