रहस्य-रोमांच का अनुभव कराता रहा ‘टोक्यो-ओलिम्पिक– २०२०’

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(भाषाविज्ञानी, समीक्षक तथा ‘ओलिम्पिक एन्साइक्लोपीडिया’ के लेखक)


२३ जुलाई, २०२१ ई० को वर्ष २०२० के ओलिम्पिक के रूप में जापान की राजधानी ‘टोक्यो’ में ग्रीष्मकालीन ओलिम्पिक का उद्घाटन हुआ था। यों तो नियमत: प्रत्येक चार वर्षों के अन्तराल पर ओलिम्पिक-खेलों का आयोजन होता है; परन्तु कोविड- १९ के संक्रमण के भय से इसका आयोजन पाँच वर्षों पर करना पड़ा था। उद्घाटन-समारोह के समय विविध प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम किये गये थे। उसी बीच, स्टेडियम में पाँच महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करनेवाला एक-दूसरे से जुड़ा हुआ पंच चक्र उभरा था। पंच चक्र को उन वृक्षों से तैयार किया गया था, जिनके पौधे वर्ष १९६४ के ‘टोक्यो-ओलिम्पिक’ के दौरान जापानी खिलाड़ियों ने लगाये थे। टोक्यो-ओलिम्पिक का आदर्श वाक्य था– ‘United By Emotions’। इसका शुभंकर ‘मिराइतोवा’ था। इसके लोगो में पाँच छल्ले लगे थे। ओलिम्पिक-ज्योति का नाम ‘सकुरा’ रखा गया था। इस ओलिम्पिक की आधिकारिक भाषाएँ ‘अँगरेज़ी’ और ‘फ्रांसीसी’/’फ्रेंच’ निर्धारित हैं। ओलिम्पिक-ध्वज की लम्बाई और चौडाई का अनुपात दो और तीन (२:३) का होता है। ओलिम्पिक-खेलों के इतिहास में ऐसा पहली बार देखा गया कि बत्तीसवें ग्रीष्मकालीन ओलिम्पिक के रूप में टोक्यो-ओलिम्पिक कोविड-संक्रमण के भय के कारण दर्शकरहित ‘नेशनल स्टेडियम’ में आयोजित किया गया था। ग्रीष्मकालीन ओलिम्पिक ‘प्रमुख’ ओलिम्पिक के रूप में माना जाता है। इस ओलिम्पिक का उद्धाटन जापान के सम्राट् नारुहितो ने किया था, जिसमें केवल १,००० गण्यमान्य अतिथि उपस्थित थे, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन भी सम्मिलित थीं। स्मरणीय है कि जापान इससे पूर्व वर्ष १९६४, वर्ष १९७२ तथा वर्ष १९८८ में ओलिम्पिक-खेलों का आयोजन कर चुका है। इस बार के आयोजन में ३३ खेल-प्रतियोगिताओं की ३३९ स्पर्द्धाएँ सम्मिलित की गयी थीं, जिनके लिए ४२ खेलकूद-स्थलों की व्यवस्था की गयी थी। इसमें २०६ देशों के लगभग ११,००० खिलाड़ियों ने भाग लिये थे। इसी बीच एक अप्रिय घटना घट गयी थी। टोक्यो-ओलिम्पिक उद्घाटन-समारोह के निदेशक कोबायाशी को इतिहास के एक दु:खद तथ्य के लिए उपहासपूर्ण भाषा का प्रयोग करने के लिए उनके पद से हटा दिया गया था। वह घटना ‘होलोकॉस्ट’ के नाम से चर्चित हो चुकी है।

अन्तत:, २३ जुलाई से ८ अगस्त, २०२१ ई० तक जापान की राजधानी ‘टोक्यो’ में आयोजित वर्ष २०२० की ओलिम्पिकखेल-कूद-प्रतियोगिता सम्पन्न हुई। उस ओलिम्पिक का समापन-समारोह टोक्यो के मुख्य स्टेडियम में विविध नयनाभिराम सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रदर्शन के साथ सम्पन्न हुआ था। समापन-समारोह के लिए जो सांस्कृतिक कार्यक्रम किया गया था, उसका नाम था, ‘Worlds we share’ (हम सबका अपना संसार) था, जो रेखांकित करता था– हममें से प्रत्येक अपने संसार में रहते हैं। स्टेडियम में बने मंच पर पहले मेज़बान देश जापान का राष्ट्रध्वज लाया गया था। उसके बाद टोक्यो-ओलिम्पिक में प्रतिनिधित्व कर रहे समस्त देशों के राष्ट्रध्वज एक घेरे में दिखायी दे रहे थे। उसके बाद सभी खिलाड़ी एक-के-बाद-एक आते दिखे थे। सम्पूर्ण वातावरण में इतनी भव्यता थी, जो सभी का मन मोह रही थी। एक अजीब-सा वातावरण था; १७ दिनों के बाद एक-दूसरे से बिछुड़ने का दर्द अलग ही था, जो करुणा-प्रधान था। सभी खिलाड़ी, प्रशिक्षक, अधिकारी आदिक न चाहते हुए भी एक-दूसरे से अलग होने की स्थिति में आ रहे थे। सम्पूर्ण वातावरण भावना-प्रधान दिख रहा था। समापन-समारोह में वर्तमान और भविष्य के ग्रीष्मकालीन खेलों के मेज़बान क्रमश: जापान और फ्रांस की संस्कृति को कलात्मक ढंग से प्रदर्शित किया गया था।
समापन-समारोह के समय जो खिलाड़ी-देशों का परेड निकला था, उसमें भारत की ओर से पूर्व-घोषित खिलाड़ी (पहलवान) और इस ओलिम्पिक के काँस्य-विजेता बजरंग पूनिया भारत राष्ट्र के ध्वजावाहक थे। भारतीय पुरुष हॉकी-खेल के कप्तान और टोक्यो-ओलिम्पिक के काँस्यपदक-विजेता मनप्रीत सिंह और महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम ने उद्घाटन-समारोह में ध्वजावाहक की भूमिका का निर्वहण किया था।

वर्ष २०२० के टोक्यो-ओलिम्पिक के गवर्नर यूरिको कोइको ने अन्तरराष्ट्रीय ओलिम्पिक कमेटी के अध्यक्ष थॉमस बाक/बाच को ओलिम्पिक-ध्वज सौंपा था। उसके बाद थॉमस बाक ने उस ध्वज को पेरिस के मेयर एनी/एने हिडाल्गो को सौंपा था, फिर फ्रांस का राष्ट्रगान प्रस्तुत किया गया था, तद्पश्चात् स्टेडियम में फ्रांस के राष्ट्रध्वज को फहराया गया था, जो इस तथ्य को प्रमाणित कर रहा था कि वर्ष २०२४ के ओलिम्पिक-खेल फ्रांस की राजधानी ‘पेरिस’ में आयोजित किये जायेंगे। ‘एफिल टॉवर’ पर ‘ओलिम्पिक ध्वज’ भी फहराया गया था। इसके साथ ही अन्तरराष्ट्रीय ओलिम्पिक कमेटी के अध्यक्ष थॉमस बाक ने औपचारिक रूप से वर्ष २०२० के टोक्यो-ओलिम्पिक के समापन की घोषणा की थी। उन्होंने ६७ हज़ार दर्शकों की क्षमता से युक्त सामान्य दर्शकरहित स्टेडियम में बने मंच से सम्बोधित करते हुए कहा था– इस अत्यन्त कठिन दौर में हम सब जी रहे हैं और इन सबके बीच आपने संसार को आशा की किरण दिखायी है। मैं अब टोक्यो में चुनौती से भरी इस बत्तीसवीं ओलिम्पिक-यात्रा के समापन की घोषणा करता हूँ, जो शान्ति, एकजुटता तथा आशा का प्रतीक है। अब आप सबसे हमारी भेंट पेरिस में होगी। इसके साथ ही ओलिम्पिक ध्वज को वर्ष २०२४ के ओलिम्पिक- आयोजक-देश ‘फ्रांस’ को सौंप दिया गया था। उसके बाद स्टेडियम के चारों ओर की गयी आतिशबाज़ी से सम्पूर्ण वातावरण जगमगा रहा था, तभी स्टेडियम में एक वाक्य उभरा था— ‘अरिगातो’, जिसका अर्थ था, ‘थैंक यू’ (धन्यवाद)। इसके साथ ही ओलिम्पिक-ज्योति निष्प्रभ (बुझाना) कर दी गयी थी।

ज्ञातव्य है कि टोक्यो- ओलिम्पिक के उद्घाटन-समारोह के दो दिनों-पूर्व यानी २१ जुलाई को ही ‘फुकुशिमा’ में ‘सॉफ़्टबॉल’ खेल-प्रतियोगिता आयोजित की गयी थी। पहला पदक-समारोह २४ जुलाई को हुआ था। इस ओलिम्पिक में संयुक्त राज्य अमेरिका ने ३९ स्वर्ण, ४१ रजत तथा ३३ काँस्यपदक (कुल ११३ पदक) अर्जित कर, पदकतालिका में शीर्ष पर रहा; चीन ३८ स्वर्ण, ३२ रजत तथा १८ काँस्यपदक (कुल ८८ पदक) जीतकर दूसरे तथा २७ स्वर्ण, १४ रजत तथा १७ काँस्यपदक (कुल ५८ पदक) के साथ जापान तीसरे स्थान पर रहा, जबकि ग्रेट ब्रिटेन ने २२ स्वर्ण, २१ रजत तथा २२ काँस्यपदक-सहित कुल ६५ पदक के साथ चौथे स्थान पर था।

टोक्यो-ओलिम्पिक : महत्त्वपूर्ण तथ्य और आँकड़े

● सीरियाई टेबिल टेनिस- खिलाड़ी हेण्ड जाज़ा ने मात्र १२ वर्ष की अवस्था में ओलिम्पिक में भाग लेकर सबसे कम अवस्था की खिलाड़ी बनने का कीर्तिमान स्थापित किया है। उनसे पहले वर्ष १९६८ के ओलिम्पिक में स्केटर बीट्राइस हस्टियू ने मात्र ११ वर्ष की अवस्था में ओलिम्पिक में भाग लिया था।
● ऑस्ट्रेलिया के घुड़सवार एण्ड्रू हॉय पुरुष-वर्ग में ६२ वर्ष की अवस्था में ओलिम्पिक में भागीदारी करनेवाले सर्वाधिक अवस्था के खिलाड़ी हैं। वे वर्ष १९८४ के ‘लॉस एंजेलिस-ओलिम्पिक’ से भागीदारी करते आ रहे हैं।
● सबसे कम अवस्था (१३ वर्ष ३३० दिन) की जापानी खिलाड़ी मोमिजी निशिया ने पहली बार इस ओलिम्पिक में सम्मिलित किये गये खेल ‘स्केट बोर्डिंग की स्पर्द्धा में स्वर्णपदक जीतकर एक नया इतिहास बनाया है। इतना ही नहीं, १३ वर्षीया ब्राजील की महिला खिलाड़ी रेयस्सा लील ने इसी स्पर्द्धा में रजतपदक जीता है।
● सर्वाधिक अवस्थावाले कुवैत के खिलाड़ी ५७ वर्षीय अब्दुला अल-राशिदी ने निशानेबाज़ी- स्पर्द्धा में काँस्यपदक जीतकर कीर्तिमान स्थापित किया है।
● ऑस्ट्रेलिया की ६६ वर्षीया घुड़सवार मैरी हन्ना इस ओलिम्पिक में भाग लेनेवाली अधिकतम अवस्था की खिलाड़ी बन चुकी हैं।
● ‘साप्पोरी ओडोरी पार्क’ में सर्वाधिक गौरवपूर्ण आयोजन पुरुष-वर्ग के ४२ किलोमीटर ‘मैराथन दौड़-प्रतियोगिता’ में केन्या के एलिउड किपचोगे (Eliud Ki pchoge) ने २ घण्टे ८ मिनट तथा ३८ सेकण्ड में दूरी तय कर स्वर्णपदक जीता है। इसी प्रतियोगिता में नीदरलैण्ड के आब्दी नागीये (Abdi Nageeye) ने दूसरा और बेल्जियम के बशीर आब्दी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है कि किपचोगे ने वर्ष २०१६ के रियो-ओलिम्पिक में भी मैराथन दौड़ में प्रथम स्थान अर्जित कर स्वर्णपदक जीता था। ओलिम्पिक मैराथन दौड़ में अब तक की सबसे तेज़ मैराथन जीत २ घण्टे ६ मिनट ३२ सेकण्ड की है, जो किपचोगे के ही नाम है।
● महिलाओं की मैराथन दौड़-प्रतियोगिता में केन्या की पेरेस जेपचिरचिर ने २ घण्टे २७ मिनट २० सेकण्ड में पूरी कर प्रथम स्थान अर्जित किया है। केन्या की ही ब्रिगिड कोसगेई द्वितीय और संयुक्त राज्य अमेरिका की धाविका माली सिडेल तृतीय स्थान पर रहीं।
● जमैका की इलेन थॉम्पसन हेरा ने महिलाओं की १०० मीटर फ़र्राटा दौड़ में फ़्लोरेंस ग्रिफ़िथ जॉयनर की ३३ वर्षों-पूर्व सियोल-ओलिम्पिक में बनाये गये १०.६२ सेकण्ड के कीर्तिमान् को भंग कर १०.६१ सेकण्ड का कीर्तिमान् बना लिया है।
● टोक्यो-ओलिम्पिक का प्रथम स्वर्णपदक चीन के खिलाड़ी यांग कियान ने अर्जित किया है।
● संयुक्त राज्य अमेरिका के पुरुष तैराक कैलेब ड्रेसल (Caeleb Dressel) ने इस ओलिम्पिक में ५ स्वर्णपदक, दो नये ओलिम्पिक-कीर्तिमान तथा दो नये विश्व-कीर्तिमान अपने नाम किये हैं।
● ऑस्ट्रेलिया की २७ वर्षीया तैराक एमा मैकॉन (Emma Mckeon) ने इस ओलिम्पिक में इतिहास रचते हुए, सर्वाधिक ७ पदक (४ स्वर्ण और ३ काँस्यपदक) अर्जित किये हैं।
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टोक्यो-ओलिम्पिक में भारत की स्थिति

● ओलिम्पिक-खेलों में भारत की यह पच्चीसवीं हिस्सेदारी थी।
● भारतीय दल में कुल २२८ सदस्य शामिल थे, जिनमें मुख्य खिलाड़ी, वैकल्पिक खिलाड़ी, प्रशिक्षक, अधिकारी तथा सहयोगी सम्मिलित थे।
● इस ओलिम्पिक में कुल ११९ खिलाड़ी शामिल थे, जिनमें ५२ महिला और ६७ पुरुष खिलाड़ियों ने भाग लिये थे।
● इस ओलिम्पिक-आयोजन में भारत के सर्वाधिक खिलाड़ियों ने भागीदारी की थी।
● उद्घाटन-समारोह में पुरुष-हॉकीदल के कप्तान मनप्रीत सिंह और छ: बार की विश्व-चैम्पियन महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम ने ध्वजवाहक की भूमिका निभाया था।
● भारतीय खिलाड़ियों ने कुल ८५ पदकों के लिए प्रदर्शन किये थे।
● कोविड-संक्रमण के प्रति सावधानी बरतते हुए, उद्घाटन-समारोह में भारत की ओर से केवल १८ खिलाड़ियों की ही भागीदारी थी।
● भारत ने इस ओलिम्पिक में कुल ७ पदक जीतकर अब तक के ओलिम्पिक-खेलों में सर्वाधिक पदक अर्जित करने का कीर्तिमान् बना लिया है। इसके पूर्व भारत ने वर्ष २०१२ के लन्दन-ओलिम्पिक में सर्वाधिक ६ पदक (२ काँस्य और ४ काँस्यपदक) जीते थे।
● भारत ने इस ओलिम्पिक में १ स्वर्ण, २ रजत तथा ४ काँस्यपदक जीते हैं।
● भारत इस ओलिम्पिक में पदक-तालिका में अड़तालीसवें स्थान पर है।
● भारतीय महिला भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने ४९ किलोग्राम- भारवर्ग के क्लीन और जर्क में ११५ किलोग्राम तथा स्नैच में ८७ किलोग्राम-सहित कुल २०२ किलोग्राम का भार उठाकर भारत के लिए पहला पदक (रजतपदक) जीता है।
● भाला-प्रक्षेपण में प्रक्षेपक नीरज चोपड़ा ने मात्र २३ वर्ष की अवस्था में सर्वाधिक दूरी तक भाला-प्रक्षेपण कर, ‘ट्रैक ऐण्ड फ़ील्ड’ प्रतिस्पर्द्धा में स्वतन्त्र भारत के १२१ वर्षों के इतिहास में पहली बार अपने देश के लिए स्वर्णपदक अर्जित किया है।
● नीरज चोपड़ा-द्वारा भालाप्रक्षेपण-प्रतियोगिता में जीता गया स्वर्णपदक निशानेबाज़ी में अभिनव बिन्द्रा के बाद अर्जित किया गया दूसरा व्यक्तिगत स्वर्णपदक है।
● इस ओलिम्पिक-खेल में भारत को मात्र एक स्वर्णपदक प्राप्त हुआ है, जो ओलिम्पिक-खेलों में भारत का अब तक का दसवाँ स्वर्णपदक है। भारत ने इससे पहले हॉकी में ८ और निशानेबाज़ी में १ स्वर्णपदक जीते थे।
● मीराबाई चानू ने भारोत्तोलन और रवि दहिया ने कुश्ती में रजतपदक अर्जित किये हैं।
● पी० वी० सिन्धू ने बैडमिण्टन, लवलीना बोरगोहेन ने मुक्केबाज़ी बजरंग पूनिया ने कुश्ती तथा पुरुष-वर्ग ने हॉकी में काँस्यपदक जीते हैं।
● बैडमिण्टन-खिलाड़ी पी० वी० सिन्धू लगातार ओलिम्पिक में दूसरी बार पदक जीतनेवाली भारत की प्रथम महिला खिलाड़ी बन गयी हैं। पहलवान सुशील कुमार के बाद यह दूसरी भारतीय खिलाड़ी हैं।

● भारत ने पुरुष-हॉकी- प्रतियोगिता में जर्मनी को ५-४ से पराजित कर काँस्यपदक जीता है।

इस प्रकार टोक्यो-ओलिम्पिक में कई कीर्तिमान् भंग हुए तो कई नये कीर्तिमान् स्थापित किये गये, जिसमें खिलाड़ियों का परिश्रम और उत्साह देखते ही बन रहा था। अब ओलिम्पिक का चौंतीसवाँ संस्करण वर्ष २०२४ में फ्रांस की राजधानी ‘पेरिस’ में दिखायी देगा, जिसके लिए खिलाड़ी यथाशक्य परिश्रम कर पदक जीतने के लिए कटिबद्ध होंगे।

(साभार– ‘अमर उजाला उड़ान’)
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