प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कल केन्द्रीय सूचना आयोग के नए भवन का उद्घाटन किया । इसके बाद जनता के लिए संबोधन में कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र तथा भागीदार प्रशासन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वे नई दिल्ली में मुनिरका में केन्द्रीय सूचना आयोग के नए भवन का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पारदर्शी प्रणाली जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
जब व्यवस्थाओं में पारदर्शिता आती है, लोगों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ती है। उत्तरदायित्व का भाव होता है तो सरकारों के काम करने का तरीका और योजनाओं का इम्पैक्ट दोनों ही बदल जाता है। ऐसे सेन्ट्रल इन्फोर्मेशन कमीशन जैसी संस्थाएं, ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटिबिलिटी दोनों को ही बढ़ाने में एक बहुत अहम भूमिका निभाती है। श्री मोदी ने कहा कि सशक्त नागरिक लोकतंत्र के मजबूत स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान सरकार ने विभिन्न माध्यमों के जरिये नागरिकों को जानकारी देने और उन्हें सशक्त बनाने की कोशिश की है।
आज भारत तेजी के साथ डिजीटली इम्पॉवर सोसायटी की ओर बढ़ रहा है। इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न सिर्फ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए, लेकिन तकनीक ने ट्रांसपेरेंसी और क्वालिटी सर्विस भी सुनिश्चित की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर सुधारों और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने से विभिन्न परियोजनाओं को समय पर पूरा किया गया है। श्री मोदी ने बताया कि प्रगति के जरिये उन्होंने साढ़े नौ लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की समीक्षा की है। सरकार ने लगभग 14 सौ पुराने और अनावश्यक कानूनों को रद्द किया है।
साथियों ये हमारे ही सरकार में संभव हुआ है कि दशकों पुराने वन थाउजेंड फोर हंड्रेड से ज्यादा अनावश्यक कानूनों को खत्म किया गया है और मुझे बराबर याद है कि जब में इलेक्शन कैम्पेन कर रहा था तो 2013-14 के दरमियान में भाषण करता था। मैं कहता था कुछ सरकारें कानून बनाने को अचीवमेंट मांनती हैं। मैंने कहा मेरी सरकार बनेगी तो मैं हर दिन एक कानून खत्म करूंगा। ऐसा मैंने कहा था और आज मुझे खुशी है कि अब तक हम चौदह सौ कानून खत्म कर चुके हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सीआईसी मोबाइल एप जारी किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों को अपनी जिम्मेदारियों के महत्व के बारे में जागरूक करना अनिवार्य है, क्योंकि बिना कर्तव्य निभाये अपने अधिकारों पर बल देना संविधान के मूलभूत मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सूचना के अधिकार की तरह सही ढंग से व्यवहार करने की धारणा पर चर्चा होनी चाहिए और जनता को उनके अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के बारे में जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निहित स्वार्थों के लिए अधिकारों का दुरूपयोग गलत है और यह समाप्त होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय सूचना आयोग से लोगों को सही ढंग से व्यवहार करने के बारे में जागरूक करने का अनुरोध किया।