संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की दो देशों की अप्रत्याशित यात्रा : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए ललकार

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

जो बाइडेन २० फ़रवरी को युक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडोमिर ज़ेलंस्की से मिले थे और २१ फ़रवरी को पोलैण्ड की राजधानी ‘वॉरसॉ’ मे वहाँ के राष्ट्रपति एण्ड्रेज़ डूडा से, जो कि वैश्विक मंच पर घोषित ‘युद्ध-अपराधी’ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को खुले ललकार का परिदृश्य उपस्थित करता है। हमे नहीं भूलना चाहिए कि पुतिन ने पोलैण्ड की ओर से युक्रेन को शस्त्रास्त्र-सहायता करने पर पोलैण्ड का युक्रेन-जैसी हालत बनाने की घोषणा की थी। अब बाइडेन का पोलैण्ड के राष्ट्रपति डूडा के सिर पर हाथ रख देने से उसे मनोवैज्ञानिक और सामरिक बल मिला है, साथ ही युक्रेन का बढ़चढ़कर साथ देने का प्रोत्साहन भी। इससे ‘नाटो’ देशों को भी ऊर्जा मिली है।

पोलैण्ड के राष्ट्रपति एण्ड्रेज़ डूडा

बाइडेन ने युक्रेन की राजधानी ‘कीव’ मे पहुँचकर उसे कई प्रकार के घातक शस्त्रास्त्रसहित ५०० मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता करने और ‘एअर सर्विलांस’ देने की सार्वजनिक घोषणा की थी। उन्होंने युक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलंस्की को युक्रेन के हित की रक्षा करने के लिए भरोसा दिलाया।

दूसरी ओर, रूसी परिसंघ के राष्ट्रपति पुतिन ने ‘रसियन फेडरल, मिलिट्री’ को सम्बोधित करते हुए कहा है :― संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक मानचित्र से रूस का नाम मिटाना चाहता है। वह युक्रेन को अवैध रूप से हथियार देकर हमारे युद्ध को हवा दे रहा है।

हम यदि वस्तुस्थिति का सूक्ष्म और गहन अध्ययन करते हैं तो ज्ञात होता है कि बाइडेन की उपर्युक्त (‘उपरोक्त’ अशुद्ध है।) दोनो ही यात्राएँ ‘कूटनीतिक’ रही हैं, कारण कि इस समय विश्व मे दो ही महाशक्तियाँ हैं :― संयुक्त राज्य अमेरिका और रूसी परिसंघ तथा संयुक्त राज्य अमेरिका ‘रूस-युक्रेन-युद्ध’ मे रूस की शक्ति को छिन्न-भिन्न कराना चाहता है, ताकि विश्व मे संयुक्त राज्य अमेरिका का ही ‘डंका’ बजता रहे। वह युक्रेन को हथियार भी बेच रहा है; अनुदान और ऋण भी दे रहा है।

२४ फ़रवरी, २०२२ ई० को रूसी सेना ने युक्रेन पर सबसे पहले हमला किया था। इसप्रकार दोनो के बीच लगभग एक वर्ष से लगातार युद्ध किया जा रहा है; परन्तु कोई परिणाम दिख नहीं रहा है और न ही दोनो मे से कोई भी पीछे हटने को तैयार है और न ही ठोस आधार पर समझौता करने को। इसमे दोनो ही देशों की बरबादी हुई है। युक्रेन के नगर, संसाधन, सैनिक, शस्त्रास्त की बहुत अधिक क्षति हुई है, जबकि रूस के सैनिक और उसके शस्त्रास्त्र नष्ट किये गये हैं।

इन सभी स्थितियों से यह सुस्पष्ट हो चुका है कि रूस-युक्रेन की बीच किया जा रहा युद्ध अभी और खिंचेगा। ये स्थितियाँ पुतिन को निकट भविष्य मे नयी रणनीति पर विचार करने के लिए निश्चित रूप से बाध्य करती हुई दिखेंगी।

(सर्वाधिकार सुरक्षित― आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २१ फ़रवरी, २०२३ ईसवी।)