● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ दिखाकर अपनी पीठ थपथपाने और अपने उल्लू सीधा करनेवालो!
कश्मीर मे ‘कश्मीरी पण्डित’ और ‘अन्य हिन्दू’ मारे जा रहे हैं; अब चुप क्यों हो? फ़िल्म से की गयी करोड़ों की कमाई का २५ प्रतिशत हिस्सा उन पीड़ित कश्मीर पण्डितों और अन्य हिन्दू-परिवारों तक तो पहुँचा दो।
बहुरुपिये विवेक अग्निहोत्री और अनुपम खेर कहाँ सोये हुए हैं? इन सभी ने फ़िल्मी पर्दे पर ‘कश्मीरी पण्डित’ के साथ किये गये अत्याचारों को जिस निर्ममता के साथ दिखाकर लगभग हज़ारों करोड़ रुपये कमा लिये हैं, उनमे से ५०० करोड़ रुपये तो उन ‘बेचारों’ पर ख़र्च कर देते; उनके लिए पुनर्वास की व्यवस्था तो कर देते; कश्मीर के जो विस्थापित परिवार हैं, उन्हें सुस्थापित तो कर देते; किन्तु अफ़्सोस! (‘अफ़सोस’ अशुद्ध है।) सभी धूर्त्त-मक्कार ‘चुप्पी’ ओढ़े हुए हैं।
गृहमन्त्री अमित शाह कुछ दिनो-पूर्व जम्मू-कश्मीर गये थे। उन्होंने वहाँँ के कितने कश्मीर पण्डितों और अन्य हिन्दुओं के घरों मे जाकर उनकी आर्थिक सहायता की थी?
‘रुबिया लियाक़त’ और ‘अंजनाओम कश्यप’ नामक बड़बड़िया औरतें और अमिश देवगन, रजत शर्मा, सुधीर चौधरी, भण्डारी, ऐश्वर्य, मानस गुप्ता आदिक ने जिस तरह से ज़ोर-शोर से ‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ बनानेवालों की पीठ ठोंकी थी, अब उन सभी को साँप क्यों सूँघे हुए है?
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १९ अक्तूबर, २०२२ ईसवी।)