आठ राज्यों के ए०टी०एम० के रुपये गये कहाँ?

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


देश के प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी-द्वारा ‘प्रधान मन्त्री का देश के नाम सन्देश’ को जिस रात्रि देश के समाचार-चैनलों के माध्यम से ‘नोट-परिवर्त्तन’/’नोटबन्दी’ की अप्रत्याशित घोषणा के रूप में प्रसारित किया गया था तब सभी देशवासी अवाक् रह गये थे। उसके बाद से ही देश की आर्थिक प्रगति लड़खड़ाने लगी है। आज स्थिति यह है कि देश के कई विभागों के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सरकार के पास रुपये नहीं हैं; जो पद रिक्त हो रहे हैं, उनकी पूर्ति भी नहीं की जा रही है।

इससे अधिक निन्दनीय और शोचनीय स्थिति और क्या हो सकती है कि जिस देश के खाताधारकों के रुपये बैंकों में जमा किये गये हैं, वे अपने ही रुपये निकालने के लिए पिछले चार दिनों से ए०टी०एम० के चक्कर लगा रहे हैं और एक पैसा निकाल नहीं पा रहे हैं।

मध्यप्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान अपनी असफलता का ठिकरा विपक्षी राजनीतिक दलों, विशेषत: काँग्रेस पर फोड़ रहे हैं और आर्थिक आधाररहित पृष्ठभूमिवाले वित्तमन्त्री का कहना है कि रुपये की कोई कमी नहीं है; जबकि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने आज (१७ अप्रैल, २०१८ ई०) कहा है : दो-तीन दिनों में स्थिति को सँभाल लिया जायेगा।

यहाँ तीनों वक्तव्यों को ध्यान में किया जाये तो सुस्पष्ट हो जाता है कि शिवराज सिंह चौहान, देश का वित्तमन्त्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक ‘सच’ को जानते हैं, इसीलिए उस पर पर्द: ढँके हुए हैं।

दूसरी ओर, नरेन्द्र मोदी की अदूरदर्शितापूर्ण नीतियों के कारण आज ‘बैंकिंग व्यवस्था’ अविश्वसनीय हो चुकी है और जनता अपने रुपये बैंकों से हटा रही है, जो कि उसका उचित और सुरक्षित निर्णय है।

अरुण जेटली को नरेन्द्र मोदी, यह जानते-समझते हुए कि उन्हें ‘विधि’ की समझ है, ‘वित्त-वाणिज्य की नहीं, अत्यन्त गम्भीर मन्त्रालय ‘वित्त-वाणिज्य’ थमाये हुए हैं। ऐसा इसलिए कि अपनी ‘तिकड़ी’ में जेटली को शामिल किये हुए हैं।

अब प्रश्न है, जब अरुण जेटली के अनुसार, रुपये की कमी नहीं है तब आठ राज्यों में ए०टी०एम० के रुपये गये कहाँ? सदूर अंचलों से आये हुए तीर्थयात्री भ्रमणार्थी ए०टी० एम० से रुपये नहीं निकाल पा रहे हैं; स्थानीय लोग के स्वजन-परिजन हस्पतालों में भर्ती हैं, दवा, जाँच, शल्यक्रिया के लिए आवश्यक सामग्री क्रय करने के लिए रुपये नहीं हैं; बच्चों के शुल्कादिक देने, विवाहादिक सम्पन्न करने के लिए धनराशि नहीं है। आज उन राज्यों में “जायें तो जायें कहाँ” की स्थिति बनी हुई है। आश्चर्य है कि वे सारे राज्य वही हैं, जहाँ भारतीय जनता पार्टी-शासित सरकारें हैं।

जनविरोधी बैंकिंग नीतियों और बैंक-घोटालों से देश के खाताधारक त्रस्त हो चुके हैं। यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं, जब देश के बैंक दीवालिये घोषित कर दिये जायें।

इस गम्भीर स्थिति को देखते समझते हुए, अपने मूल धन को सुरक्षित कर लेना ही समझदारी है। सरकार हमारी-आपकी आय के स्रोत को खँगालने में लगी हुई है।

जागो जनता, जागो!