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योगी सरकार के गढ्ढामुक्त अभियान की पोल खोलती सड़क, खस्ताहाल सड़क हो गई तालाब में तब्दील

कछौना (हरदोई) : उत्तर प्रदेश राज्य की सड़कों को गढ्ढामुक्त करने के योगी सरकार के अभियान को सिर्फ कागजों पर ही गति मिल रही है। सड़कें गढ्ढामुक्त होने के बजाय गढ्ढायुक्त होने के साथ दलदल सहित तालाबों में बदलती जा रही हैं। चूंकि गढ्ढामुक्त करने का अभियान सिर्फ कागजों तक ही सिमटा हुआ है इसलिए सरकार भी झूठे आकड़े दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रही है। जबकि हकीकत में गढ्ढामुक्त सड़कों पर चलना आमजनमानस के लिए एक बड़े सपने जैसा हो गया है। सड़कें अब गढ्ढामुक्त होने की जगह दलदल और तालाबयुक्त हो चुकी हैं। जिनपर चलते हुए आपके साथ कब कोई अनहोनी घटना घट जाए या जान से हाथ धो बैठे, कुछ कहा नहीं जा सकता है। ऐसी बदहाल सड़कों ने महीनों से चलाए जा रहे सरकार के गढ्ढामुक्त अभियान की पोलपट्टी खोलकर रख दी है। अभियान सिर्फ कागजों से शुरू होकर कागजों पर ही खत्म हो गया।और जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली।

जी हां, आज हम बात कर रहे हैं जनपद हरदोई के विकासखंड कछौना की ग्राम पंचायत दीननगर से पांच किलोमीटर दीननगर-कछौना (रानीबाग तक) संपर्क मार्ग की जो अब खस्ताहाल होने के साथ साथ तालाब में तब्दील होकर हजारों ग्रामीणों के आवागमन में जी का जंजाल बन गई है। योगी सरकार के कार्यकाल में गढ्ढामुक्त अभियान कितना सफल हुआ इसकी हकीकत आप इस बदहाल होकर तालाब का रूप ले चुकी सड़क की तस्वीरों को देखकर स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हैं। यह सड़क ग्राम पंचायत दीननगर से शुरू होकर बसंतपुर, उचौली, पहावां, गोविंदपुर, छतनखेड़ा, सूरतखेड़ा व महिपालखेड़ा(बहकटवा) आदि गावों को जोड़ती हुई कछौना नगर आने-जाने की मुख्य सड़क है। जिसपर प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण अपने परिवारजनों व वाहनों के साथ डर के साए में आवागमन करते हैं।

पिछले दो-तीन वर्षों से क्षेत्रीय ग्रामीण इस सड़क के पुनः निर्माण के लिए शासन-प्रशासन से अपनी गुहार लगा रहे हैं लेकिन जिम्मेदारों की खाऊ-कमाऊ नीति के चलते ग्रामीण आज भी सरकार को कोसते हुए इस खस्ताहाल और जानलेवा सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीण ऋषि सिंह, संजीव सिंह, रजत सिंह, मो० नईम, अनूप गुप्ता, पंकज कुमार, डॉ० अमरपाल, अशोक, बांके आदि ने बताया कि कई साल पहले इस सड़क का किसी तरह निर्माण हो गया था लेकिन गुणवत्ताविहीन सामग्री व कमीशनखोरी के चलते कुछ ही दिनों के बाद उखड़ कर पहले जैसी हो गई थी।तबसे आज तक सैकड़ों शिकायतों के बाद भी सड़क का निर्माण करना सरकार ने मुनासिब नहीं समझा।सरकार व संबंधित विभागों की इस अनदेखी के चलते ग्रामीणों में सरकार के प्रति भयंकर आक्रोश फैल रहा है जिसका यदि समय रहते निराकरण करते हुए सड़क निर्माण नहीं किया गया तो ग्रामीणों का यह आक्रोश आंदोलन में तब्दील हो सकता है।जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

रिपोर्ट ➖ एस.बी.सिंह सेंगर