एक परीक्षार्थी को ५०० में से ‘४९९’ अंकों का दिया जाना, ‘जाँच’ का विषय बनता है

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


आज (२६ मई, २०१८ ई०) सी०बी०एस०ई० बारहवीं का परीक्षापरिणाम घोषित किया गया है, जिसमें नोएडा की ‘स्टेप बाई स्टेप स्कूल’ की मेघना श्रीवास्तव को ५०० पूर्णांक में से ४९९ अंक दिये गये हैं। मेघना के विषय हैं :– अंगरेज़ी, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र तथा मनोविज्ञान।
घोर आश्चर्य! मेघना को अंगरेज़ी-विषय को छोड़कर शेष चारों विषयों में १०० में से १०० अंक दिये गये हैं। ऐसे में, प्रश्न उठना और उठाना औचित्यपूर्ण है :– इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र तथा मनोविज्ञान में १०० में से ‘१०० अंक’ कैसे दे दिये गये? अंगरेज़ी में उसे १०० में से ९९ अंक मिले हैं। ऐसा हो सकता है, अंगरेज़ी में मेघना को १०० में से १०० न देकर ९९ इसलिए दिये गये हों ताकि कहीं उस अप्रत्याशित परिणाम पर अँगुलियाँ न उठ सकें — पाँचों विषयों में १०० % अंक कैसे मिल गये हैं? बहरहाल, इस परिणाम पर मैं अँगुली उठा रहा हूँ और पारदर्शी ढंग से जाँच की माँग करता हूँ। अब अँगुली तो उठ चुकी है। निश्चित रूप में यह परीक्षा-परिणाम पूरी तरह से ‘सन्देह के घेरे’ में आ चुका है।

५०० में से ४९९ अंक कैसे मिल गये हैं? इस प्रकार के परीक्षा-परिणाम से दो बातें उभर कर आ रही हैं :– पहली, मेघना श्रीवास्तव के पक्ष में अविश्वसनीय अंक देकर-दिलाकर उसे ‘टॉपर’ का रूप दिया गया है; दूसरा, मूल्यांकन-प्रक्रियाओं में लापरवाहियाँ बरती गयी हैं।
जो भी हो, ‘सच’ सामने आना चाहिए, ताकि वास्तविक ‘टॉपर’ सामने आ सके और परिश्रमी परीक्षार्थी को न्याय मिल सके।

(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २६ मई, २०१८ ई०)