कश्तियाँ नहीं चलती

जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद

उस ओर विधायकों के काफिले हैं गुजरते,

जिस ओर गरीबों की बस्तियाँ नहीं पड़तीं!
उस ओर से गुजरते हैं इनके उड़नखटोले,
जिस ओर बारिश में कश्तियाँ नहीं चलती!
उस ओर ही बसाते हैं ये अपनेे कारखानों को,
जिस ओर ज़ह्र भरी धुंध भट्ठियाँ नहीं उगलतीं!
गरीब को लूटो और गरीबों का ही करो पतन,
जब तक न जताओ हक़ नीतियाँ नहीं बदलतीं!
जब तक न उखाडेंगे इनके हौसले को ‘जगन’ हम
तब तक इन नेताओं की जातियाँ नहीं  सँभलतीं!