शतचंण्डी महायज्ञ में उमड़ा जनसैलाब

             सुरसा : बाबा दुग्धेश्वर नाथ शिव शक्ति आश्रम जगतपुरवा पर नवरात्र के उपलक्ष्य में चल रही महायज्ञ में माधौगंज से पधारे राजेश शास्त्री ने मां कत्यायनी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि षष्ठम माता कात्यायनी अर्थात माँ दुर्गा के छठे रूप को माँ कात्यायनी के नाम से पूजा जाता है।यह ज्ञान देवी और माता सरस्वती का रूप है।जिन कन्यायों के विवाह में किसी प्रकार से विलम्ब हो रहा हो।उन्हें माता के इस स्वरुप की पूजा अवश्य करनी चाहिए। सभी प्रकार की बाधाएं खत्म हो जायेगी।
              महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनकी इच्छानुसार उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं. महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा को कात्यायनी कहा गया.देवी कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं इनकी पूजा अर्चना द्वारा सभी संकटों का नाश होता है, माँ कात्यायनी दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं. देवी कात्यायनी जी के पूजन से भक्त के भीतर शक्ति का संचार होता है। इसके पश्चात पं कमजोर शास्त्री रामबिलास शास्त्री आधार कु. रेखा शास्त्री बाबा रास बिहारी जी व आश्रम के पुजारी पं. परशुराम तिवारी ने अपने भाव रखे।