
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
-डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
रेलगाड़ी और विद्यालय-बस की दुर्घटना में मारे गये १३ विद्यार्थियों के लिए सर्वाधिक दोषी उनके माँ-बाप और अभिभावक हैं। क्या बच्चे पैदा करना ही माँ-बाप का कर्त्तव्य है? क्या किसी भी विद्यालय में अपनी सन्तान का प्रवेश कराकर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेना ही माँ-बाप की भूमिका है?
जिस विद्यालय में माँ-बाप अपने बच्चों का प्रवेश कराते हैं, उसकी पृष्ठभूमि और वर्तमान वातावरण से अवगत रहने का दायित्व किसका है?
अधिकतर निजी शिक्षालय शिक्षा नहीं करते; अपितु शिक्षा का बाज़ारीकरण करते हुए खुला धन्धा करते हैं; ऐसे शिक्षालय अवैध रूप में संचालित किये जाते हैं और बड़ी रक़्म लेकर शिक्षाविभाग,ज़िला-प्रशासन आदिक के प्रमुख अधिकारी मौन साधे रहते हैं।
ज्ञातव्य है कि उत्तरप्रदेश-राज्य के अन्तर्गत कुशीनगर में बस-रेलगाड़ी दुर्घटना में बस में बैठे हुए जितने अबोध बालक-बालिकाओं की निर्मम मृत्यु हो चुकी थी, उस विद्यालय को अवैध रूप में संचालित किया जा रहा था; वह विद्यालय नियमत: मान्यतान्तर्गत नहीं है। माँ-बाप ने इस पक्ष को समझा था? जिन लघु वाहनों में अधिकतम ८-१० बच्चे बैठ सकते हैं, उनमें जब २५-३० बच्चे ठूँस कर बैठाये जाते हैं तब उसे देख-समझकर माता-पिता ने विद्यालय-प्रशासन को चालक की लापरवाही बरतने की सूचना विद्यालय-प्रबन्धक को दी थी? वाहन-चालक के पास नियमत: वाहन चलाने का अनुभव है अथवा नहीं, इसे जानने की कोशिश की गयी? वाहन को विद्यालय तक ले जाने के लिए वाहन-चालक वाहन को किन-किन मार्गों से ले जाता था? इन प्रश्नों को समझने के लिए माँ-बाप ने कौन-सा प्रयास किया था? उत्तर स्पष्ट है, नहीं, जिसका परिणाम माँ-बाप ने अपने १३ बच्चों को खोकर भुगता है।
ज़िला-प्रशासन की भूमिका भी सन्दिग्ध है। ज़िला-प्रशासन का दायित्व बनता है कि वह सभी निजी विद्यालयों को नियमत: पंजीकृत कराने के लिए बाध्य करे, न कि रिश्वत लेकर निजी शिक्षण-संस्थाओं को खुला खेल करने के लिए आज़ाद कर दे। उक्त घटना से सम्बन्धित ज़िला-प्रशासन, शिक्षाविभाग, परिवहन-विभाग आदिक जितने की भी ज़िम्म:दारी बनती है, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की ज़रूरत है। वहाँ का बेसिक शिक्षा-अधिकारी क्या कर रहा था? ज़िले के एस०डी०एम०, ए०डी०एम० तथा डी० एम० क्या कर रहे थे? इसकी गम्भीरतापूर्वक जाँच करायी जानी चाहिए।
विद्यालय-प्रशासन का उत्तरदायित्व अधिक है। जिस निजी शिक्षणसंस्थान की १३ बालक-बालिकाएँ दुर्घटना में मारी गयी थीं, वह अवैध रूप में संचालित किया जा रहा था; और अब उस निजी विद्यालय को प्रतिबन्धित कर, प्रधानाचार्य को गिरिफ़्तार किया जा चुका है। जिस वाहन-द्वारा बच्चों को ढोया जा रहा था, वह वाहन कितने साल पुराना था? उसका चालक कितना अनुभवी था, इसका परीक्षण विद्यालय-प्रबन्धन ने किया था?
उल्लेखनीय है कि इस समय देश में मानवरहित क्रॉसिंग की कुल संख्या ७,७०७ हैं। वर्ष २०२० तक नरेन्द्र मोदी ने मानवरहित समस्त फाटकों को समाप्त करने की घोषणा की थी। इतना ही नहीं, वर्ष २०१७ में जितनी संख्या में मानवरहित फाटक बन्द करने की घोषणा की थी, वह अभी तक पूरी न हो सकी है। ‘बुलेट ट्रेन’ चलवाने के लिए उत्साह है; परन्तु मानवरहित रेल-फाटकों को सुरक्षित बनाने के प्रति कोई विश्वसनीय जागरूकता क्यों नहीं दिख रही है?
उक्त दुर्घटना-प्रकरण से उत्तरप्रदेश के मुख्य मन्त्री आदित्यनाथ योगी भी प्रत्येक मृतक की क़ीमत मात्र दो लाख लगाकर वस्तुस्थिति से पल्ला नहीं झाड़ सकते।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; २६ अप्रैल, २०१८ ई०)