एगो भोजपुरी गजल

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-


डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)

जे-जे रहे दोस्त सब दुसमन होइ गइले,
हमारा रहतिया में काँटा बोई गइले!
बड़ा हँसी आवेला ‘बाबू’ के चल्हकिया पर,
जे सुरूज के गोला के चनरमा समुझि गइले!
डूबत उ खूब देखइहें सुरूज महाराज के,
हमारा खातिर उ गरहन होइ गइले!
”तहरा खातिर रात-दिन हम एक करब”,
सब भूली-भली के मझधार में डुबोई गइले!
कहें खातिर अझुरावतार भरोसवा के जलिया में,
कहाँ बा बिसवास सब केहु ता ठगि गइले?
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद ; २४ मई, २०१८ ईसवी)