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आप समस्त सुशिक्षित-प्रशिक्षित ‘अनियोजित’ (बेरोज़गार) विद्यार्थियों के लिए एक गुरु (डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय) का सन्देश’

भाषाविद्-समीक्षक आचार्य पं॰ पृथ्वीनाथ पाण्डेय
  • सामूहिक आर्थिक साम्राज्य की स्थापना करें।

आप अनियोजित (बेरोज़गार) विद्यार्थियों की संख्या लाखों में है और आप में अभियोग्यता की कोई कमी नहीं है।

आप सभी मिलकर एक ‘प्रतियोगी प्रकाशन’ आरम्भ करके अरबों-खरबों रुपये सम्मान के साथ अर्जित कर सकते हैं और इसके अन्तर्गत अन्य अनियोजित विद्यार्थियों का भविष्य भी सुक्षित कर सकते हैं।

अभी हम ‘उत्तरप्रदेश’ को लेकर चलते हैं।हम मानकर चलते हैं कि सम्पूर्ण उत्तरप्रदेश में आप सभी की संख्या लगभग एक लाख है। उनमें से आप मात्र १०० विद्यार्थियों की एक कार्यकारी समिति गठित कर लें। आप अपना एक बैंक-खाता भी खोल लें। प्रत्येक विद्यार्थी से एक बार में आप मात्र सौ रुपये एकत्र कर लें। इस प्रकार आपके खाते में सौ लाख रुपये यानी एक करोड़ रुपये जमा हो गये। अब आप एक प्रतियोगी प्रकाशन का नाम-चयन कर, उसका पंजीयन कराकर ‘एल०टी०’, ‘बी०एड्०’, ‘टी०जी०टी-पी०जी०टी०’, ‘आई० ए०एस०- ‘पी०सी०एस०’, एस०एस०सी० आदिक परीक्षाओं से सम्बन्धित ‘पूरी अध्ययन-सामग्री’ (कुल सेट) का क्रमिक प्रकाशन करें। पाँच वर्षों के भीतर आप सभी अनियोजित विद्यार्थियों का एक अनुकरणीय ‘सामूहिक आर्थिक साम्राज्य’ स्थापित हो जायेगा। इसके लिए धैर्य और परिश्रम को अपना ‘मित्र’ बनाना होगा। आरम्भ में, यह समय-साध्य और कष्टसाध्य लगेगा; परन्तु धीरे-धीरे सुखमय वातावरण का दर्शन होगा।

वैसी स्थिति में यही बेईमान सरकारें आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक साम्राज्य को देखकर हतप्रभ रह जायेंगी। आपमें लेखन, सामग्री-चयन तथा सम्पादन की क्षमता है, उसका भरपूर सदुपयोग कीजिए।

ध्यान रहे, इस एक प्रकाशन से आप अनेक व्यावसायिक स्वरूपों से जुड़ते जायेंगे, जिनपर केवल आप सभी का प्रभुत्व रहेगा।

अन्य राज्यों के अनियोजित विद्यार्थीवृन्द भी इस मार्ग को अपनाकर आर्थिक अभाव की प्रतिपूर्ति कर सकते हैं। आप सभी को आर्थिक अभाव से मुक्ति दिलाकर एक वैभव-सम्पन्न साम्राज्य की ओर ले जाने के लिए यह एक उत्तम मार्ग है। इस दिशा में आप सभी सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ें; मैं आपके साथ हूँ।

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