
(प्रख्यात भाषाविद्-समीक्षक)
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय-
अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं पर भारत-सरकार की नीतियाँ कितनी खोखली हैं और राजनीतिक इच्छाशक्ति का कितना अभाव है, सुस्पष्ट होता जा रहा है। भारत की सामरिक नीतियों को अपने कूटनीतिक आचरण से पाकिस्तान ध्वस्त करता आ रहा है और भारत-सरकार का संचालन करनेवाले डरपोक और नीतिविहीन राजनेता उसकी बातों में आकर अपने मूल्यवान सैनिकों को गँवाते आ रहे हैं। सीमा पर युद्धबन्दी की बात के नाम पर वर्ष २०१८ में अब तक सीमा सुरक्षा बल के २४ सैनिक मारे जा चुके हैं और २६ नागरिक भी, जो पिछले पाँच वर्षों में सर्वाधिक भारतीय सैनिकों की हत्या की घटना है। १३ जून, २०१८ ई० को सीमा सुरक्षाबल के ३ अधिकारी और १ सैनिक मारे जा चुके थे और दूसरे दिन हमारा एक और सैनिक मारा गया है, जबकि बाइक से आये दो आतंकियों ने भारतीय सैनिक पर पत्थर के टुकड़े से प्रहार कर, उसकी राइफल छीन ले गये हैं और एक सैनिक का अपहरण कर लिया गया है; दूसरी ओर, प्रधान मन्त्री और गृहमन्त्री मौन बने हुए हैं। भारत की ओर से वर्ष २०१६ में ‘ऑपरेशन रुस्तम’, वर्ष २०१७ में ‘ऑपरेशन अर्जुन’ तथा वर्ष २०१८ में ‘ऑपरेशन भीम’ चलाया गया; परन्तु कोई ठोस परिणाम हासिल नहीं हुए। पिछले छ: माह में गोलाबारी बन्द करने के समझौते के बाद भी १,००० बार पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी की गयी थी।
२९ मई, २००३ ई० को भारत-पाकिस्तान की ओर से जो युद्धबन्दी का समझौता किया गया था, उसी का सन्दर्भ लेकर पाकिस्तान के डी०जी०एम०ओ० ने भारत से वार्त्ता की थी और आपसी सहमति भी बनी थी; परन्तु दो हफ्ते के बाद ही पाकिस्तान की ओर से पुन: गोलाबारी शुरू हो गयी थी; २९ मई, २०१८ ई० को पुन: पाकिस्तान के डी०जी०एम०ओ० के साथ युद्धबन्दी पर वार्त्ता हुई थी। ३ जून, २०१८ ई० को सीमा सुरक्षा बल के २ सैनिक मारे गये। ४ जून, २०१८ ई० को भारत के सीमा सुरक्षा बल और पाक रेंजर्स बल के बीच युद्धबन्दी पर वार्त्ता हुई थी; परन्तु उसके बाद भी पाकिस्तान अपनी दोगली नीति से अलग न हो सका और लगातार भारत-पाक अन्तरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी करता रहा और सैनिकों को ढेर करता रहा।
उक्त विषय पर भारत-सरकार की गम्भीरता और उसकी राजनीतिक इच्छाशक्ति नितान्त खोखली नज़र आ चुकी है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; १४ जून, २०१८ ई०)