- गोशालाएं कागजों पर संचालित
- गोशालाएं कागजों पर संचालित हैं
- 2019 के लोकसभा चुनाव में बन सकता है किसानों का मुद्दा
- ब्लेड वाले तार लगाने वाले किसानों पर ठोस कार्यवाही की जाये
कछौना, हरदोई – योगी सरकार में गो वध अधिनियम कानून का कड़ाई से पालन व वर्तमान में मशीनीकरण के कारण गोवंश की उपयोगिता न होने के कारण गोवंश की काफी दुर्दशा है। किसानों द्वारा खेतों में फसल बचाने के लिए लगाए गए ब्लेड वाले तारों से घायल होकर तड़प तड़प कर मरने को विवश हैं और कभी किसान नुकीले धारदार हथियार से मार कर घायल कर देते हैं। वहीं कूड़े की पॉलीथीन खाकर मौत के मुंह में समा रही हैं।
सरकार गाय के नाम पर केवल झुनझुना बजा रही है। गोशालाएं कागजों पर संचालित हैं। जिसके चलते गाँव गांव सड़कों पर हजारों की संख्या में आवारा पशु घूमते नजर आते हैं। जिससे सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। आवारा पशुओं द्वारा किसानों की फसल का काफी नुकसान हो रहा है। फसल बचाने के लिए किसान रात रात भर रतजगा कर नींद खराब कर रहे हैं। रोजगार के लिए ग्रामीण दूसरे राज्यों में पलायन करते हैं। तब वह अपने जानवर छोड़ कर चले जाते हैं। यह भी एक अहम कारण है। श्रावस्ती मॉडल के के बाद कोई भी ग्राम सभा के चरागाह, चकरोड खाली नहीं हो पाए हैं। यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। पशु विभाग द्वारा पशु गणना में खानापूर्ति की जाती है। सरकार द्वारा गोवंश पालने के लिए कोई प्रभावी योजना भी नहीं बनाई गई है। इसलिए गरीब किसान गायों के पालने से मुंह मोड़ रहे हैं।
आखिर गरीब किसान गायों का पोषण कैसे करें। इसके लिए सरकार द्वारा क्या कोई ठोस कदम उठाया गया है। गो हत्या पर पाबंदी की तैयारी आधी अधूरी है। गाय के दूध, गोमूत्र व गोबर से किसान का अर्थतंत्र मजबूत होगा। जिससे वह गायों को पालना शुरू कर देगा। एक ग्रामीण ने बताया वास्तव में जब तक हम गाय और खेती दोनों को लाभकारी नहीं बनाते हैं, तब तक इनके संरक्षण की बात करना बेईमानी है। वर्तमान समय में आवारा गोवंश की हालत काफी खराब है। यह गांव में चोटिल होकर तड़प तड़प कर मर जाते हैं और कभी-कभी गांव में सांप्रदायिक हिंसा का कारण बनती हैं। जय-हिंद जय-भारत मंच ने शासन को पत्र लिखकर आवारा पशुओं के संवर्धन के लिए पत्र लिखा है। आवारा पशुओं को छोड़ने वाले पशुपालकों को जागरुक किया जाना चाहिए । ब्लेड वाले तार लगाने वाले किसानों पर ठोस कार्यवाही की जाये। ग्राम सभा के चरागाह, खलिहान, वन भूमि पर अवैध कब्जा हटवाकर पशुओं के चारे आदि के लिए तैयार किए जाएं। न्याय पंचायत स्तर पर एक गोशाला बनवायी जाए। समय रहते इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में किसानों का मुद्दा बनेगा। जिसका सरकार कोई जवाब नहीं दे पाएगी।
रिपोर्ट : पी०डी० गुप्ता