डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
भारतीय राजनीति के शिखर-पुरुष, ‘डी० एम० के०’ के महारथी ९४ वर्षीय ‘मुत्तुवेल करुणानिधि’ इस असार संसार में अब नहीं रहे हैं। उन्हें ‘भारत की राजनीति’ में ‘किंग मेकर’ का स्थान प्राप्त है।
वे वर्षों से मूत्ररोग से पीड़ित थे। रोग गम्भीर होने पर उन्हें चिकित्सालय में प्रवेश कराया गया, जहाँ आज (७ अगस्त, २०१८ ईसवी) अपराह्न ६ बजकर १० मिनट पर उनका निधन हो गया।
मात्र १४ वर्ष की अवस्था में अपने राजनीतिक जीवन आरम्भ करनेवाले करुणानिधि एक प्रखर राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, अपितु एक सारस्वत हस्ताक्षर भी थे। लगभग १०० पुस्तकों के प्रणेता करुणानिधि ७५ फ़िल्मों के लेखक भी थे। उनकी पहली फ़िल्म ‘राजकुमारी’ थी। ‘हिन्दी हटाओ’ के वे कट्टर समर्थक थे और ब्राह्मणवाद के निन्दक भी। उन्होंने ‘श्री राम’ के अस्तित्व को ही अस्वीकार कर दिया था।
उल्लेखनीय है कि करुणानिधि दक्षिणभारत की राजनीति में पाँच दशकों से अधिक समय तक छाये रहे। वे चुनावों में कभी पराजित नहीं हुए। एम० जी० रामचन्द्रन् ने उनका राजनीतिक स्तर प्रभावित किया था। पाँच बार तमिलनाडु के मुख्यमन्त्री बने और उनके नाम लगातार १३ बार विधायक चुने जाने का कीर्तिमान है।
वे तीन पत्नियों के पति थे और एक सम्पन्न परिवार के प्रमुख भी। वे काले रंग का मोटा ऐनक लगाते थे और कन्धे पर पीले रंग का एक वस्त्र धारण करते थे। यही उनकी प्राथमिक पहचान थी।