उत्तरप्रदेश-सरकार का फ़रमान जारी :– ‘पाठशाला’ नहीं, ‘गोशाला’ ज़रूरी

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय


सुनो-सुनो-सुनो!
जहाँ-जहाँ पाठशालाएँ हैं वहाँ-वहाँ अब लावारिस घूम रहीं गायों के लिए ‘गोशालाएँ’ बनायी जायेंगी, इसलिए माँ-बाप कल से अपने बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था अब स्वयं करें। उत्तरप्रदेश की सरकार अब गायों को नौकरी पर रखेगी; दूध-दही, गोबर तथा चमड़े का धन्धा अलग से करेगी। इंसान की औलाद को पढ़ाने से सरकार के हक़ में भला क्या आयेगा?


उत्तरप्रदेश-सरकार के ज़िलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस-अधिकारी आदिक को अब उक्त प्रकार की गायों की देखभाल का दायित्व सौंपा जायेगा; क्योंकि इससे बढ़कर तथाकथित ‘हिन्दुत्व’ की सच्ची सेवा और कुछ भी नहीं हो सकती। काग़ज़ी हिन्दूवादी सरकार यह सिद्ध करके रहेगी कि मनुष्य की तुलना में ‘गोशाला’-गाय’-‘गोबर’ का स्थान सर्वोपरि है।


आइ०ए०एस०, पी०सी०एस०, आइ०पी० एस०-अधिकारी, पुलिस-निरीक्षक, दारोगा, सिपाही आदिक बनने का ख़्वाब वही लोग देखें, जो राजनेताओं के तलुए सहलाने में प्रवीण हों; जाहिल-काहिल विधायक-सांसदों की एक घुड़की पर आत्मसम्मान को धूल चटाने के लिए प्रस्तुत हों; खुले आम मारे जा रहे आइ०ए०एस०-पी०सी०एस०, पुलिस-अधिकारियों आदिक के पक्ष में आवाज़ उठाने का साहस नहीं कर सकते हों तथा सभ्य लोग को प्रत्येक स्तर पर यातना देने में समर्थ और स्वयं की तुलना में बेहद अयोग्य नेताओं के क़दमों पर अपनी ‘पगड़ी’ रखकर अपनी पीठ ठोंकवाने में दक्ष हों।
आक् थू!
(सर्वाधिकार सुरक्षित : डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, इलाहाबाद; ५ जनवरी, २०१९ ईसवी)