पुस्तक समीक्षा, कृति:- हास्य व्यंग्य की भेलपुरी (हास्य व्यंग्य संग्रह)

लेखक:- विनोद कुमार विक्की
प्रकाशक:- रवीना प्रकाशन ,दिल्ली
पृष्ठ:-118


समीक्षक:- राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित”

देश के युवा व्यंग्यकार विनोद कुमार विक्की बिहार प्रान्त के महेशखूंट गाँव जो खाकसार में आता है। ठेठ देहात से चल कर देश के कोने कोने के व्यंग्यकारों के साथ साथ अपनी लेखनी के जादू से देश मे स्थापित व्यंग्यकारों में शामिल एक बड़ा नाम है। व्यंग्यकार उन्हें व्यंग्य गुरु मानते हैं। जिस प्रकार भेलपुरी में तीखा खट्टा मीठा सभी प्रकार का जायका रहता है ठीक विक्की जी की प्रस्तुत कृति में भी सामाजिक आर्थिक राजनेतिक क्षेत्रवाद जातिवाद सम्बन्धी विसंगतियों को लघु व्यंग्य व्यंग्य व्यंग्य कविताओं एवम छोटी छोटी क्षणिकाओं के माध्यम से अभिव्यक्त करने का जादुई काम किया है।

प्रस्तुत कृति की भाषा बिहारी का पुट लिए सीधी सरल व बोधगम्य है। धर्मपत्नी व्यंग्य में घरेलू हिंसा एक्ट दहेज उत्पीड़न योन उत्पीड़न जैसे कीमती आभूषण पहनने में आज महिलाओं को तनिक गुरेज नहीं है। हिन्दू मैरिज एक्ट कानून की आड़ में महिलाएं कैसे अधिकार मांगती है। समाज की अर्वाचीन तस्वीर को साफ करती व्यंग्य रचना बहुत अच्छी लगी। मेरे साथ सात जन्मों का एग्रीमेंट है।

इस भूखण्ड पर गधे रिपेयर होते हैं व्यंग्य में मंहगाई बेरोजगारी भ्रष्टाचार लोकतंत्र जनित रोग हैं। खद्दरधारी नेता, भगवाधारी साधु आदि की पोल खोलती व्यंय रचना इस कृति के प्राण है। मुफ्त डाटा व आटा मिलने के कारण आज का मानव विलासी बनता जा रहा है।

सेलिब्रेटी बनने का सुख में बताया कि आजकल लोगो को आज एक नया शौक लगा है सेलिब्रेटी बनने का। फेसबुक अनंत फेसबुक कथा अनंता में सात वर्ग लेखक ने बताए कि आजकल सोशल मीडिया का दुरुपयोग लोग किस किस तरीके से कर अपना कीमती समय बरबाफ कर रहे हैं। आखिर यह कैसा शौक ? कैसी महत्वाकांक्षा? लाइक ठोको ग्रुप सेल्फी ग्रुप जादूगर ग्रुप तन्हा वर्ग कमाल की कैटेगरी बताई। आजकल समय की जो कमी बताते है वही सबसे ज्यादा फेसबुक चलाने में व्यस्त व मस्त रहते हैं।

मूर्खतन्त्र के डिजिटल गधे में विक्की जी ने बताया कि न्यू मीडिया पर कम्पनियां अपने उत्पादों का झूठा प्रचार कर किस ढंग से ग्राहकों को फंसाती है।उदाहरण के लिए तीन हज़ार पांच सौ रुपये में आईफोन सेवन का ख्वाब दिखाना।फेसबुक पर फर्जी आई डी बनाने वाले दिनोदिन बढ़ रहे हैं। पुरुष स्त्री बनकर आई डी बना रहे हैं।

वेलेंटाइन वीक के अंतर्गत बताया कि जो वेलेंटाइन डे मनाते है वे कैसर संगठनों की लाठी के शिकार होते हैं। माता पिता वृद्धाश्रम में सास ससुर की जय जयकार आज यही हो रहा है। आज लोग नवरात्रि में कन्याओं को नौ दिन तक कन्याओं का पूजन किया जाता है। दूसरी ओर कन्या भ्रूण हत्या बेटे की चाह में की जाती है। ये ही समाज का सच है।

ऊपरी आमदनी से बाबू घर चला रहे हैं। दफ्तरों में बिना वजन रखे फाइल के कागज़ उड़ जाते हैं। दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। आस्था की आड़ में धर्म का व्यापार चल रहा है। धर्म भीरू जनता के साथ धर्म के पापी ठेकेदार रोज खेल खेल रहे हैं। आजकल वो लोग सबसे ज्यादा मोबाइल चला रहे हैं जिनके मोबाइल में तो 84 दिन का डाटा होता है मगर घर जाकर देखो तो रसोई में न चावल न आटा होता है। गरीबी में इंटरनेट का खर्च करना क्या वास्तव में इतना जरूरी है क्या ?

आजकल अनपढ़ लोग देश चला रहे हैं। वे महंगी महंगी कारों में सैर सपाटे कर रहे हैं। डिग्रीधारी बेरोजगार हैं वो रिक्शा चला पेट भर रहे हैं। आजकल कौआ दरबार लगा है। जो भृष्ट है वो दरबार सजाए वाहवाही लूट रहे है। हंस पहरेदार बन खड़ा है। जब असत्य का बोलबाला होता है तो सत्य बाहर चला जाता है लेकिन जीत सत्य की ही होती है।

मोबाइल से भली सौतन में बताया कि आजकल पत्नियाँ घरों में इसलिए दुखी है कि पति रात दिन मोबाइल चलाने में व्यस्त रहते हैं। घर वालों के लिए उनके पास समय नहीं। न उन्हें खाने पीने की सुध है। बच्चों से बात करने पत्नी से बात करने का उनके पास वक़्त नहीं है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ व्यंग्य में अवाक रह जाता है जब इस नारे का सच पाठक जानता है। गांवों के सरकारी स्कूलों में दिया जाने वाला मिड डे मील यानी पोषाहार गरीब लोगों के लिए अच्छी योजना साबित हुआ है। जिस परिवार में एक ही माता पिता की पांच से अधिक संताने है। जिन्हें भरपेट भोजन भी नहीं मिलता वे लोग बालक बालिकाओं को स्कूल में भोजन के लिए नाम लिखाते है उन्हें पढ़ाई से कोई लेना देना नहीं। ये हमारे देश की गरीबी का कड़वा सच है।

अभूतपूर्व भारत बंद में दुकान लूटना आगजनी स्टेशन लूटना आमजन को परेशान करना। दूध अखबार सब बन्द करना। यातायात ठप्प करना ये सभी अभूतपूर्व बजट बन्द के महत्वपूर्ण अंग है। नोट के बदले वोट आजकल वोट के लिए पैसा दारू खटिया लेकर लोग वोट देते हैं। बाद में लोग ई वी एम मशीन को बदनाम करने लगते हैं। राजनीति में कैसे चुनाव से पूर्व प्रलोभन दिये जाते है बताया गया है।

अस्पृश्यता व्यंग्य में जो वक्ता छुआछूत नहीं करना चाहिए। जातिवाद खत्म होना चाहिए ऐसा बोलने वाले बाहर से कृत्रिम मुस्कराहट परंतु अंदर से धर्मभृष्ट होने का भय करने वाले लोगो की सच्चाई बताई है। आज भी जातिवाद खत्म नहीं हुआ है। लोगो के विचार संकीर्ण है। भला दो ग्रास खाने या पीने सर धर्म भ्रष्ट होता है भला। स्कूल के औचक निरीक्षण में पोषाहार साइकिल छात्रवृति आदि की जानकारी तो मांगी गई लेकिन पढ़ाई कैसी चल रही ये नहीं पूछा गया । जो जरूरी है उसे कोई नहीं पूछता । सरकारी स्कूलों के निरीक्षण की पोल खोलता व्यंग्य सामयिक लगा।

महिला सशक्तिकरण को देखिए महिला सरपंच का सारा कार्य पुरुष कर रहे। अंगूठे से बिल पास हो रहे। विकास अधिकारी के बगल में बैठी सरपंच। और कैसे हो महिला सशक्त।यदि ऐसा होता रहा तो कैसे बनेगी महिलाएं आत्मनिर्भर,सबल सशक्त। उनकी रक्षा के लिए घर का एक आदमी हर जगह साथ साथ चलता है। मीटिंगों में आना जाना। सरपंच पति या देवर साथ रहता है।

साहित्यिक सम्मान आजकल उन लोगों को मिलता है जो चापलूसी करते है। आगे से आगे चाटुकारिता करने में लग जाते हैं। ऐसे लोग कम समय मे ही बड़े बडे सम्मान पा लेते हैं सच्चे साहित्यकार घरों में बैठे ही रह जाते हैं। आदरणीय समन्निय कहकर मख्खन लगाने वाले सम्मान पा लेते हैं। आरक्षण व्यंग्य में छोटे बच्चे द्वारा बनारस के घाट पर पूजा पाठ करते बच्चे की जिसकी अभी पढ़ने लिखने की उम्र है ।पूछने पर ज्ञात हुआ कि आरक्षण से ज्ञात हुआ कि इसे बड़े होने पर कोई नोकरी नहीं मिलेगी इसीलिए पूजन पाठ की ट्रेनिंग दी जा रही है। वैसे चौदह वर्ष के बच्चों से काम करवाना बाल श्रम में आती है। सवर्णो के साथ सरकार कैसा न्याय कर रही है। करारा व्यंग्य परोसा है।

डायन व्यंग्य में विधवा टीबी से पीड़ित महिला का दर्द लिखा है। चौधरी की नीयत में खोट थी उसने उस महिला को कैसे डायन बना दी। दीनू पांच सौ के लालच में आ गया। घर साहूकार की संपत्ति होता है। सबल को नहि दोष गुसाईं। राम सीता की जोड़ी में दूसरे जाति वाली लड़की से विवाह करने की बात को महिलाएं किस ढंग से लेती है। कैसा मजाक बनाती है। वाकई समाज मे आज भी जातिवाद है। ऊंचनीच है।पंडित की बेटी छोटी जात वालों से शादी। बिना माँ की बेटी,कुल धर्म का नाश,दुखनी चाची दूसरी जाति से ब्याह।

बैंक के वी आई पी कस्टमर में बैंक कर्मियों द्वारा ग्राहकों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है ये बताया है। उनके चहेतों लोगो को जल्दी से फ्री कर दिया जाता है। प्रतिष्ठित या धनाढ्य लोगों के लिये कोई नियम नहीं होता। गरीब घण्टों तक कतारों में लगा रहे। जब उसका नम्वर आये तब खिड़की बन्द हो जाती है। जो रजनीगंधा खिलाये तुलसी की पुड़िया दे दे या जो प्रतिदिन पचास लाख से ऊपर का लेनदेन करे वह बिना कतार में खड़े सीधे केबिन में जाकर काम कर जल्दी से घर चला जाता है। आजकल बैंकों में ये हो चलन चल रहा है।

बेटी बचाओ के लिए खूब भाषण दिये जाते हैं। वही लोग पत्नी को अल्ट्रासाउंड कराने की कहते है। अबकी बार बेटी हुई तो खत्म करो। क्या ऐसे लोग बेटी बचा पाएंगे।सचिव महिला दिवस पर ऐसे ही बेटियों पर बखान करता है। वही सबसे बड़ा बेटियों का हत्यारा निकला । शान्तिभोज व्यंग्य में बताया कि लोग जीते जी तो कुछ नहीं खिलाते है मगर मरने के बाद आत्मा की तृप्ति के लिए हजारों रुपये खर्च करते हैं। बाह्य आडम्बर भूखी माँ का इकलौता बेटा माँ की एल आई सी बीमा वाले बेटे।

बनवारीलाल जी डेढ़ लाख खर्च करते हैं।पांच प्रकार की मिठाई व्यंजन बनाते हैं। पंडित जी का नाश्ता जिसमे पचपन पूड़ी खाई जाती है यदि पूरा भोजन हो तो। पेटू पंडित पर शानदार व्यंग्य। समाज के शुभचिंतक में सामान्य वर्ग के एक ही घर के तीन लोगों को सरकारी नोकरियाँ मिल जाना बड़ी बात हो गई आजकल । दहेज खाता,सब्जियों का समनेलन मजबूरी का नाम मातृभाषा रावण हैप्पी फादर्स डे टेगियो की घुसपैठ आदि व्यंग्य भी हास्य से परिपूर्ण है।

व्यंग्य कविताएं व क्षणिकाएं एक से बढ़कर एक उम्दा है।लेखक की अभिलाषा, कौआ के दरबार मेें, डिजिटल बाबा, खद्दर का शोक, व्यंग्य क्षणिकाएं शानदार बन पड़ी है। मुझे इस कृति की व्यंग्य कविता की चन्द पंक्तियां पसंद आई “राम नाम की आड़ में रावण है तैयार। मूढ़ों के अन्धविश्वासो पर भक्ति का व्यापार।।” प्रखंड कल्याण पदाधिकारी विक्की जी की यह कृति”हास्य व्यंग्य की भेलपुरी” व्यंग्य साहित्य में नया इतिहास लिखेगी इसी विश्वास के साथ आदरणीय विनोद कुमार विक्की जी को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।

  • 98,पुरोहित कुटी,श्रीराम कॉलोनी,भवानीमंडी
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