मार्गदर्शन-
आरती जायसवाल (साहित्यकार, समीक्षक)
जीवन संघर्ष से निराश हुए बिना, अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा का विकास करें।
१-जीवन में आने वाली बाधाओं और हार से निराश हुए बिना प्रतिभा के आधार पर अपने लक्ष्य का निर्धारण करें। ‘असफलता’ और ‘हार’ से निराश नहीं होना चाहिए – यह जीतने की पहली सीढ़ी हो सकती है, क्योंकि हर बड़ी सफलता के पीछे लम्बा संघर्ष और अनेकों असफलताएँ छुपी होती हैं।’ स्वयं को सकारात्मक बनाएँ और आशापूर्ण होकर सही दिशा में आगे बढ़ें बज़ाय स्वयं को कोसने के अथवा अपनी तुलना अन्य किसी से करने के।
२- यह ‘कोरोना काल’ है और हमारा संघर्ष हर प्रकार से बढ़ गया है । यह ‘कोरोना काल’ की विभीषिका से जूझने और स्वयं तथा अपने घर-परिवार,समाज व राष्ट्र को मज़बूत बनाए रखने का समय है। सभी अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता रहे हैं ऐसे में; सभी को चाहिए कि वे सकारात्मक बनें और बच्चों को भी सकारात्मकता सिखाएँ क्योंकि “सकारात्मकता में ही सार्थकता है।”
३- ध्यान रखें ‘आप सबकुछ नहीं बन सकते’ किन्तु अपनी कार्यक्षमता,प्रतिभा और दृढविश्वास के साथ एक दिशा में सर्वश्रेष्ठ अवश्य बन सकते हैं। अतः सर्वप्रथम अपने भीतर छुपे सर्वश्रेष्ठ गुणों को परखें । सभी की कार्यक्षमता और मानसिक स्तर भिन्न होता है । अपना आकलन करें कि आप क्या कर पाएँगे? तत्पश्चात् सकारात्मक दिशा में जीवनपथ पर आगे बढ़ें।
४- आधुनिकता के इस आर्थिक युग में संवेदनहीन होकर सिर्फ़ मशीन बनकर न रह जाएँ । मानव-जीवन का मोल समझते हुए अपने तथा अपनों के लिए जीना सीखिये।
५- अपनों के साथ-साथ कुछ सपने अपने लिए भी बुनें और उन्हें पूरा करने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दें। निराशा जनक बातों और नकारात्मक टिप्पणियों पर ध्यान न दें अपने लक्ष्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहें।
६- जीत-हार, आशा-निराशा,सुख-दुःख जीवन के संगी-साथी हैं । अपने जीवन को नवीन आशाओं, ऊर्जा तथा जिजीविषा से ओत-प्रोत रखें।