देश की प्रतियोगितात्मक परीक्षाओं में धाँधली करानेवाले ‘सॉल्वर गैंग’ पुलिस-गिरिफ़्त में

— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

सोमवार (२२ जून) को ‘ऑन-लाइन’ करायी गयी उत्तरप्रदेश सिपाही भरती परीक्षा में एक बहुत बड़ा खेल हुआ है, जिसके खिलाड़ी बहुत ही शातिर हैं। वे सभी शातिर एक-एक कर दबोचे जा रहे हैं। उनसे पूछताछ करने पर ज्ञात हुआ है कि देश की किसी भी प्रतियोगितात्मक परीक्षा का विज्ञापन प्रकाशित होते ही परीक्षाओं से सम्बन्धित प्रश्नपत्रों के प्रश्नों के उत्तर देनेवाले (सॉल्वर गैंग) शातिर खिलाड़ी चौकन्ने हो जाते हैं, विशेषत: उत्तरप्रदेश और बिहार के प्रमुख ज़िलों में ये गैंग सक्रिय हैं। उत्तरप्रदेश के मथुरा, अयोध्या, फ़ैजाबाद, शिकोहाबाद, फ़िरोज़बाद, एटा, बुलन्दशहर, मेरठ, इलाहाबाद, वाराणसी, बलिया, गोरखपुर आदिक ज़िलों में ये गैंग अपना-अपना जाल फैलाये हुए हैं, जिनका सरगना बिहार राज्य के गणित का अध्यापक राजेश कुमार महतो बताया जा रहा है। उसे भी पुलिस ने धर-दबोचा है। हरियाणा, पानीपत तथा सोनीपत से भी शातिर पकड़े गये हैं।

उल्लेखनीय है कि नितिन शुक्ल (बलिया), सत्येन्द्र सिंह (मेजा, इलाहाबाद), कौशल सिंह पटेल (भदोही), इमरान अली (उतराँव), पवन कुमार सिंह (आरा) को गजराज सिंह स्कूल ऐण्ड कॉलेज, नैनी, इलाहाबाद में फ़र्ज़ीवाड़ा करते हुए बन्दी बना लिया गया है। वे सभी ‘बैंकिंग’, ‘रेलवे’, ‘नीट’ आदिक परीक्षाओं में वे सभी मिलकर धाँधली का खेल खेलते थे।

फ़र्ज़ी परीक्षार्थी

२२ जून को करायी गयी उत्तरप्रदेश सिपाही भरती परीक्षा में पवन कुमार सिंह ने राम कुमार यादव के स्थान पर परीक्षा दी थी। विवेक कुमार, विपिन कुमार, शंकर कुमार (सभी बिहार के और सॉल्वर) धीरेन्द्र कुमार (अभ्यर्थी, बिहार), विकास यादव, अनिल गिरि, आनन्द यादव, संजीव सिंह, सुनील कुमार, अमरनाथ यादव (सभी गोरखपुर) उक्त परीक्षा में परीक्षार्थी के रूप में थे; परन्तु उनके स्थान पर किराये पर लाये गये सॉल्वर बैठाये गये थे। अब वे सभी पुलिस-हिरासत में हैं, जिनसे कठोरतापूर्वक पूछताछ की जा रही है। उनके अतिरिक्त बेहद शातिर दुर्योधन, धर्मेन्द्र तथा अनीस भी पकड़े गये हैं।

उक्त कुकृत्य में सम्मिलित सुभाष, संजय तथा देवव्रत भी हैं, जो मेरठ के रहनेवाले हैं। वे मेरठ में करायी जानेवाली प्रतियोगितात्मक परीक्षाओं के परीक्षा-भवनों में बड़ी संख्या में धनराशि देकर मेधावी विद्यार्थियों को दूसरे परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा दिलाकर वास्तविक अभ्यर्थियों से पाँच से छ: लाख रुपये ऐंठते थे। वे सॉल्वरों को एक लाख रुपये देते थे, शेष अपने पास रख लेते थे। बहुत बड़े स्तर पर हेराफेरी करवाकर वे जिसको चाहते थे, परीक्षाओं में सफल करा देते थे। वे शातिर आधार कार्ड में लगे चित्र को बदलकर और चित्र को कुछ धुँधलाकर ‘सॉल्वरों’ को परीक्षाभवन में बैठाते थे।
‘रेलवे ग्रुप डी परीक्षा’ में बड़ी संख्या में उन्होंने अभ्यर्थियों को सफलता दिलायी है। उन सभी का कहना है कि उनका फ़र्ज़ीवाड़ा इससे पहले तक सफलतापूर्वक चलता रहा था। गिरोह के सदस्यों ने फ़र्ज़ी फिंगर प्रिण्ट की मदद से ‘बॉयोमिट्रिक एटेण्डेंस सिस्टम’ को भी पछाड़ने की युक्ति निकाल ली थी।

‘स्पेशल टास्क फोर्स’ (एस० टी० एफ०) ने सावधानी बरतते हुए, उक्त सभी बेईमानों को २३ जून को गिरिफ़्तार कर लिया था।

सॉल्वर दुर्योधन (बायें), मध्य में मुख्य आरोपित अनीस तथा धर्मेन्द्र (दायें)

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २५ जून, २०२० ईसवी)