डीएम, एसएसपी ने किया रेल प्रज्ञा पत्रिका का विमोचन

बदायूं: बदायूं जनपद के साहित्य जगत में अब एक उपलब्धि और जुड़ गई है, जनपद के सुप्रसिद्ध कवि, गीतकार स्व0 डाॅ0 उर्मिलेश की स्मृति में देश की लाइफ लाइन कही जाने वाली रेलवे के सम्पूर्ण देश में संचालित राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित की जाने वाली रेल प्रज्ञा पत्रिका का अंक डाॅ. उर्मिलेश को समर्पित किया है। इस अंक का विमोचन कलैक्ट्रट सभागार में जिलाधिकारी कुमार प्रशान्त एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार त्रिपाठी ने किया।

इज्जतनगर बरेली मण्डल पूर्वोत्तर रेलवे के राजभाषा अधिकारी प्रभाकर कुमार मिश्रा द्वारा सम्पादित अंक में डाॅ. उर्मिलेश को समर्पित अनेक साहित्यकारों जैसे ओमनीरव, डाॅ. रामबहादुर व्यथित, सोनरुपा विशाल आदि के लेख, उनके स्वंय की कवितायें आदि सम्मिलित की गई हैं। समिति द्वारा पुण्यतिथि पर आयोजित डाॅ. उर्मिलेश को समर्पित की गई वीडियो की प्रस्तुति प्रतियोगिता के विजयी प्रतियोगियों सरिता सिंह चैहान प्रथम, राजकुमार द्वितीय, फिरोज खां तृतीय, एवं समीक्षा यादव व जया सिंह को सात्वंता पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा सरस्वती मां के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर पुष्प अर्पित कर किया गया, साथ ही डाॅ. उर्मिलेश के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। आयोजन समिति डाॅ. उर्मिलेश जनचेतना समिति की ओर जिलाधिकारी को सोत नदी को पुर्नजीवित करने के उनके प्रयास के लिए एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जिले में बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था बनाने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। समिति की ओर से दोनों अतिथियों को तुलसी का पौधा भेंट किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीएम ने रेलवे को बधाई देते हुये कहा कि बदायूँ जनपद को पहचान दिलाने में डाॅ. उर्मिलेश के योगदान को युगो-युगों तक पीढ़ी याद रखेगी, उन्होंने अपनी साहित्य सृजन के साथ-साथ बदायँू क्लब एवं बदायँू महोत्सव के माध्यम से जो सांस्कृतिक चेतना की अलख जगाई है। युवाओं को आगे बढ़ाने और मंच प्रदान करने का उनका जो उद्देश्य था, वो कितना सकारात्मक कदम था, उनके साहित्य अमर है, उनकी रचनायें हमेशा लोगों के दिलों में जिन्दा रहेंगी, उनके पुत्र ने सार्थक और सराहनीय प्रयास उनको स्मरण करने का अवसर प्रदान करते रहेंगें।

कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे एसएसपी ने डाॅ. उर्मिलेश को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कवि और उसका साहित्य अमर है, और उनकी ख्याति आज उनके बाद भी उत्तरोत्तर बढ़ रही है, जो उनकी श्रेष्ठता का सच्चा प्रमाण है, उनकी लिखी कालजयी रचनाओं को पढ़ते हुए उन्होंने कहा कि ये रचनायें आज भी प्रासंगित हैं, सोत नदी बहती है कितने वर्ष पहले लिखी रचना होगी किन्तु आज जब जिले में सोत बचाओ अभिायान चलाया जा रहा है तो ये पंक्तियां कितनी चरितार्थ सिद्ध हो रही हैं। ऐसे साहित्यकार वन्दनीय हैं, उनके सम्मान में किये गये प्रत्येक कार्य उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ. रामबहादुर व्यथित ने डाॅ. उर्मिलेश के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुये अपने उद्गार व्यक्त किये। डाॅ. उर्मिलेश के पुत्र एवं समिति के सचिव डाॅ. अक्षत अशेष ने अपने पिता के व्यक्तित्व को याद करते हुये उनकी कुछ पंक्तियां एवं कवितायें प्रस्तुत करने के साथ ही पत्रिका के सम्बन्ध रेलवे का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि अंक के प्रकाशन से परिवार, साहित्य प्रेमी एवं जनपद वासी सभी गौरवान्वित हैं, यह निश्चित ही साहित्य, कविता और पूरे बदायँू जनपद का सम्मान है, जिसके लिए रेलवे के आभारी हैं पूर्व में रेलवे द्वारा ही बदायँू नगर के रेलवे स्टेशन पर डाॅ. उर्मिलेश स्मृति वाचनालय एवं पुस्तकालय की स्थापना एवं इस अंक के सम्पादक व राजभाषा अधिकारी प्रभाकर मिश्रा के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

अन्त में डाॅ. अक्षत अशेष ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन रविन्द्र मोहन सक्सेना ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में भा.ज.पा. महामंत्री शारदेन्दु पाठक, बायर्स एसोसियेशन दिल्ली के चेयरमैन नेल्सन, ज्योति मेंहदीरत्ता, दीपक सक्सेना, परविन्दर सिंह दुआ, प्रदीप शर्मा, राहुल चैबे, रेलवे के प्रवीण शुक्ला, जी. आर. पी. एफ. इन्सपेक्टर अशोक कुमार मिश्रा, नरेश चन्द्र शंखधार, सुमित कुमार मिश्रा, सतपाल सिंह सोलंकी, रविभूषण पाठक, आर्येन्द्र कुमार, प्रभाकर शर्मा, सौरभ शंखधार, सुशील शर्मा, राजेश मौर्य आदि उपस्थिति रहे।