पत्थर हो जाऊँ 

डॉ. सुधेश (से. नि. हिन्दी प्राध्यापक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय)-


डॉ. सुधेश

यदि पत्थर हो जाऊँ

और कोई उस पर फूल चढ़ा दे

तो पत्थर भी पुजने लगता है

वहाँ खड़ा होता है मन्दिर

भक्तों की लगती भीड़

पत्थर का देवता

हो जाता  है मंज़िल

कितने कितने जनों की ।