जिला उद्यान अधिकरी सुरेश कुमार ने जनपद आलू उत्पादक किसानों को अवगत कराया है कि आलू के अच्छे उत्पादन हेतु सम-सामयिक महत्त्व के कीट एवं रोगों की उचित समय पर नियंत्रण नितान्त आवश्यक है । आलू की फसल अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग के प्रति अन्यंत संवेदनशील होती है । प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नव वातावरण में अगेती/पिछेती झुलसा रोग का प्रकोप बहुत तेजी से फैलता है व फसल को अधिक नुकसान होता है।
उन्होंने कृषकों से कहा है कि आलू फसल को अगेती एवं पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए जिंक मैगनीज कार्बामेट 2.0 से 2.5 किग्रा0 को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टर की दर से पहला रक्षात्मक छिड़काव बुवाई के 30-45 दिन बाद अवश्य करें । रोग नियंत्रण हेतु दूसरा एवं तीसरा छिड़काव कापर आक्सीक्लोराइड 2.5 से 3.0 किग्रा0 अथवा जिंक मैगनीज कार्बामेट 2.0 से 205 किग्रा0 में से किसी एक रसायन का चयन कर 800-100 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टर से 10-12 दिनों के अन्तर पर करें । दूसरे एवं तीसरे छिड़काव के साथ ही माहू कीट का नियंत्रण आवश्यक है, क्योकि इसके प्रकोप से आलू बीज उत्पादन प्रभावित हो सकता है । इसलिए दूसरे व तीसरे छिड़काव में फफूंदनाशक के साथ कीटनाशक रसायन जैसे डायमेथोएट 30 ई0सीच या मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 ईसी0 1.0 लीटर अथवा मोनोक्रोटोफास 36 ई0सी0 750 मि0ली0 को प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाकर छिड़काव करें । अधिक जानकारी के लिए जिला उद्यान कार्यालय, कम्पनी बाग से सम्पर्क करें ।