★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
२४ फरवरी, २०२१ ई० को ‘सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम’ का नाम बदलकर ‘नरेन्द्र मोदी स्टेडियम’ कर दिया गया था। ऐसे में, सहज ही प्रश्न आत्मसम्मान के साथ खड़ा हो जाता है— क्या सरदार पटेल ‘मुसलमान’ थे? जिस लौहपुरुष सरदार पटेल की परछाईं के चरणों की धूलि-बराबर नरेन्द्र मोदी नहीं हैं, उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम का नाम हटवाकर अपने नाम से नामकरण कराकर नितान्त गर्हित चरित्र का परिचय दिया है।

हमें भूलना नहीं चाहिए, नरेन्द्र मोदी वही व्यक्ति है, जिसने महात्मा गांधी जी के सूत कातते हुए-चरखा चलाते हुए चित्र के स्थान पर ‘सूत कातते हुएऔर चरखा चलाते हुए, अपना चित्र’ लगवा दिया था। खादी ग्रामोद्योग की दैनन्दिनी (डायरी) के आवरणपृष्ठ से गांधी जी का चित्र हटवाकर नरेन्द्र मोदी का लगवा दिया गया था। इतना ही नहीं, उस कृतघ्न व्यक्ति ने महात्मा गांधी जी का चित्र हटवाकर केवल गांधी जी के ऐनक को रखवा दिया था। नरेन्द्र मोदी ने अपनी मूर्ति तक बनवा डाली और प्रकारान्तर से ”अहम् ब्रह्मास्मि” का खोखला उपदेशक बन गया।
नरेन्द्र मोदी कहनेभर के लिए ‘प्रधानमन्त्री’ हैं; किन्तु उस व्यक्ति ने जिस तरह से भारतीय लोकतन्त्र की जड़ में चूना और तेज़ाब डाल दिये हैं, उसके लिए आनेवाला कल उससे लोकतन्त्रीय विनाश का हिसाब माँगेगा।
एक नरेन्द्र मोदी बुद्धिमान् और शेष लोग मूर्ख हैं। वह व्यक्ति शब्द गढ़ने में माहिर है और शब्द पकड़ने में भी तेज़। यही कारण है कि पिछले सात वर्षों से वह व्यक्ति देशवासियों को वशीभूत किये हुए है और जमकर अपना उल्लू सीधता करता आ रहा है।
अब समय आ चुका है, देश की जनता जागे, अन्यथा वह देश को बेचकर निकल पड़ेगा; क्योंकि वह ज़ुम्लेबाज़ रँगा-चँगा ‘फ़क़ीर है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २३ मार्च, २०२१ ईसवी।)