राजेश पुरोहित, भवानीमंडी
नई दिल्ली:- साहित्य संगम संस्थान इलेक्ट्रानिक हिंदी साहित्यिक मंचों में एक प्रतिष्ठित मंच है। इसकी स्थापना 5.7.2016 को थोड़े से साहित्यकारों को लेकर हुई थी आज वह संगम को छोटी सी धार वृहद् रूप ले चुकी है। इसका मुख्य कारण यहां का स्नेह, प्रेम ,एकता भरा वातावरण है। साहित्य संगम संस्थान ऐसा मंच है जहां हर साहित्यकार स्वतंत्र चित्त से मनोभावों को प्रकट कर सकता है।
आप सबको जानकर बहुत हर्ष महसूस होगा की 5.7.21को उसी साहित्य संगम संस्थान की पांचवी स्वर्णिम वर्षगांठ बहुत धूम धाम से मानने की तैयारी चल रही है| इस वार्षिकोत्सव को चार दिवसीय मनाया जा रहा है जिसमे प्रत्येक दिवस को अति सुंदर नाम से अलंकृत कर चार चांद लगा दिए गए हैं। उत्कर्ष, परिकल्पना, नजरिया, क्षितिज क्रमशः कार्यक्रम के दिवस रखे गए हैं |
कार्यक्रम की भव्यता को बढ़ाने साहित्यिक जगत के उत्कृष्ट विद्वान मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कार्यक्रम अध्यक्ष सम्पूर्ण कार्यक्रम में उपस्थित रहकर संगम परिवार को धन्य करेंगे|
चार दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा बहुत ही सुगठित ढंग से तैयार की गई है जिसमे संगम के अधिक से अधिक रचनाकारों को शामिल किया गया है और उनकी प्रस्तुति कराई जाएगी तथा सभी सहभागियों को सम्मानित किया जाएगा। साहित्य संगम संस्थान के अध्यक्ष ,कार्यकारी अध्यक्ष,सह अध्यक्ष के कर्मठशीलत,लगन ,समर्पण,निष्ठा का ही यह प्रतिफल है कि आज साहित्य संगम संस्थान प्रतिष्ठित संस्थाओं ने अपना नाम दर्ज करा चुका है। इस वार्षिकोत्सव को भव्य बनाने में अध्यक्ष आ.राजवीर सिंह मंत्रजी, कार्यकारी अध्यक्ष आ.कुमार रोहित रोज़ जी ,सह अध्यक्ष मिथलेश सिंह मिलिंद जी के विशेष योगदान है उनके अथक प्रयास कार्यक्रम को निश्चित हो सफल बनायेंगे।