मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ) –
तुम्हारे दिल में मेरे कुछ छिपे जज़्बात रह जाएं |
मुझे तुम छोड़ न पाओ ऐसे हालात रह जाएं ||
मैं सब कुछ भूल भी जाऊँ मुझे कुछ ग़म नहीं होगा |
तुम्हारे साथ बीते पल मुझे बस याद रह जाएं ||
तुम्हारे ख़्वाब न टूटें ख़ुदा से है दुआ मेरी |
मेरे सपने हसीं सारे भले बरबाद रह जाएं ||
हर इक आँसू तुम्हारा नाम मेरे लिख दो तुम अपना |
तुम्हारे दर्द से मेरे दिल-ओ-जां शाद रह जाएं ||
मुझे तुम भूल न जाना तुम्हें मैं याद रखूँगा |
हमारे दिल बस ऐसे ही सदा आबाद रह जाएं ||
मेरे ‘मन’ में बना लो घर मुझे ख़ुद में जगह दे दो |
ज़माने के हर बन्धन से चलो आज़ाद रह जाएं ||