★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
खरगौन (मध्यप्रदेश) मे जिन दंगाइयों ने ‘रेप’ करने की धमकी दी हो; निर्दोष लोग के जन-धन की क्षति पहुँचायी हो; सार्वजनिक सम्पत्ति नष्ट की हो, वे चाहे कथित हिन्दू हों अथवा कथित मुसलमान हों, सत्यनिष्ठा के साथ एक-एक गुण्डे को चिह्नित कर, वहाँ का पुलिस-प्रशासन सार्वजनिक रूप से ऐसा दण्ड दे कि फिर कोई दंगाई ऐसा दुस्साहस न कर सके। जब दंगाई तलवार और पेट्रोल बॉम्ब लेकर भीषण उपद्रव कर रहे थे तब पुलिस-बल कहाँ था? अग्निशमन-वाहन कहाँ था? यदि पुलिस-बल की व्यवस्था थी तो पुलिसकर्मियों ने उन उग्रवादियों के पैरों मे गोलियाँ मारकर उन्हें गिरिफ़्तार क्यों नहीं किये थे?
जिस प्रकार से हिन्दू और मुसलमान के नाम पर पूरे देश मे खुली गुण्डई की जा रही है, उस पर बलपूर्वक रोक लगाने की ज़रूरत है, अन्यथा हिंसक तत्त्व सामाजिक समरसता के ताने-बाने को विच्छिन्न कर सकते हैं। एक मुसलमान नेता अकबरुद्दीन ओबैसी ने कहा था, “पुलिस को १५ मिनट के लिए हटा दो, फिर देखो।” इतना ही नहीं, कुछ वर्षों-पूर्व उसी ओबैसी ने हिन्दुओं के विरुद्ध भयंकर विष उगला था, फिर क्या हुआ उसका? क्या उसका घर कथित ‘बुल्डोजर’ से गिरवाया गया था? इससे ज़ाहिर होता है कि गुण्डातत्त्व मनबढ़ हो चुके हैं और देश मे तुष्टीकरण (‘तुष्टिकरण’ अशुद्ध है।) का घिनौना खेल खेला जा रहा है। अभी तक कई बड़े और छुटभय्ये नेता हिन्दुओं के प्रति ज़ह्र उगलते आ रहे हैं, जबकि उनके विरुद्ध कोई काररवाई नहीं की जाती। एक भ्रष्ट हिन्दू कर्मकाण्डी, उत्तरप्रदेश के सीतापुर के ‘महर्षि श्री लक्ष्मणदास उदासीन आश्रम’ के महन्त ‘बजरंगदास मुनि’ ने कहा था, “यदि किसी हिन्दू लड़की को छेड़ा गया तो वे (हिन्दू) मुसलिम बहू-बेटियों को घर से उठाकर रेप करेंगे।” उल्लेखनीय है कि जब कथित महन्त भड़काऊ भाषण कर रहा था तब उसके साथ कई पुलिसकर्मी खड़े थे। ऐसे मे, वे सभी पुलिसकर्मी भी दोषी हैं। उस घृणित महन्त ने आग मे घी डालने का काम किया है; बहरहाल, ‘महिला आयोग’ की शिकायत पर वह अब कारागार मे है।
उक्त दोनो ही कथन उत्तेजित करनेवाले हैं और उकसानेवाले भी, जिन्हें ‘भारतीय दण्ड संहिता’ की धारा २९८ के अन्तर्गत एक अक्षम्य अपराध माना गया है। ऐसे कथन साम्प्रदायिक सद्भाव को विकृत करने के लिए दोषी होते हैं।
हमारे समाज को नहीं भूलना चाहिए कि हमारे लिए जितना मुसलिम बहू-बेटियों का सम्मान है उतना ही हिन्दू बहू-बेटियों का, इसलिए कोई भी आतंकी तत्त्व किसी भी ओर उलटी नज़रें करके देखता है तो उसकी ख़ैर नहीं।
पुलिस-प्रशासन और न्यायालय को पारदर्शितापूर्वक इन गम्भीर और संवेदनशील प्रकरणों मे अपने दायित्व का सम्यक् निर्वहण करना होगा, अन्यथा देश मे अराजकता (‘आराजकता’ अशुद्ध है।) की बाढ़ आ जायेगी, जो सँभाले नहीं सँभलेगी।
जय श्री रामधारियों को चाहिए कि वे शान्तिपूर्वक
अपना कर्मकाण्ड करें और उस कर्मकाण्ड का ऐसा प्रभाव दिखे कि मुसलिम-मतावलम्बी उस कर्मकाण्ड के साथ सहजतापूर्वक अपना जुड़ाव महसूस कर सकें। हमारे देश के समाचार-चैनल उस मनोरम-मनोहर दृश्य को क्यों नहीं सामने लाते, जब ‘राम-शोभायात्रा निकलती है तब मुसलिम-मत के लोग प्रेम और आदरभाव के साथ यात्रा मे शामिल लोग को शरबत पिलाते हैं; मुसलिम लोग के पर्व पर हिन्दू लोग उनके घर जाकर गले मिलते हैं और जलपान ग्रहण करते हैं?
आज हमे ‘भारतीयता’ की उस अवधारणा को पुष्ट करना है, जिसके अन्तर्गत ‘सर्वधर्मसमभाव’ की आस्था रेखांकित होती रही है, जो हम सभी के बापू, महात्मा गान्धी की देन है।
‘छान्दग्योपनिषद्’ का मूल मन्त्र “एकोहम् बहुस्याम:” (मै अनेक रूपों मे हुआ हूँ; अर्थात् एक मै हूँ और सभी हैं।) को अङ्गीकार करना होगा; “क्योंकि इसका विरोधी पक्ष “एकोहम् द्वितीयोनास्ति” (एक मै ही हूँ; दूसरा सब मिथ्या है; अर्थात् एक मै हूँ; दूसरा और कोई नहीं।) समाजघातक है।
आइए! समरस का पान करें और करायें।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १४ अप्रैल, २०२२ ईसवी।)