मनुष्य स्वभावतः स्थाई समाधान चाहता है न कि विरोध या विद्रोह

प्रश्न : एक मित्र ने पूछा कि नेक मंशा रखते हुए भी मनुष्य मौजूदा राजनीति में असफ़ल क्यों होता है?

क्योंकि; मौजूदा राजनीति अपने सामने वाले के गलत कृत्यों का विरोध करने से शुरू होती है।

किसी का विरोध करना कभी शांतिपूर्ण, उत्थानकारी नहीं सिद्ध हो सकता।
और जो शांतिपूर्ण हो वह विरोध नहीं हो सकता।
जिसका भी विरोध करोगे वह तुम्हें शांतिपूर्ण रहने ही नहीं देगा।
अतः उसके गलत कृत्यों का विरोध करने में समय व्यर्थ गवाने के बजाय आपको जो कुछ भी सही बात / सकारात्मक कृत्य ज्ञात हो उसका समर्थन व प्रचार एवं प्रसार करते हुए औरों को समझाने का स्वभाव विकसित करें..!

सही बात व सकारात्मक कृत्य का प्रचार/प्रसार फैलते ही गलत बात व गलत कृत्य का अस्तित्व स्वतः समाप्त हो जाएगा।
और अपने सामने वाले की किसी भी गलत बात व उसके नकारात्मक कृत्य का विरोध करने में समय भी नही गवाना पड़ेगा।
मनुष्य स्वभावतः स्थाई समाधान चाहता है न कि विरोध या विद्रोह, बस उसे वो सही बात सकारात्मक सोच के साथ समझाने भर की देर है।
बात समझ में आते ही वह स्वयं सही व गलत में अंतर करना सीख लेगा क्योंकि उसके पास आपके द्वारा बताया हुवा स्थाई समाधान जो होता है।

इसतरह आपके साथ लोग जुड़ते जाएंगे और मौजूदा राजनीति में कद और पद दोनो ही महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

इसलिए “”गलत के विरोधी नही, सही के समर्थक बनो”” और अपनी टीम को भी बनाओ .. बाकी आपका मौजूदा विद्रोही ईगो जिसके आप गुलाम हो चुके हैं जो आपको सोंचने पर मजबूर करे वह करें .. आप स्वतन्त्र हैं अपने परिणाम को जीने के लिए ..

!!शुभकामना!!

राम गुप्ता (स्वतंत्र पत्रकार)
अति साधारण कार्यकर्ता/प्रचारक
आमआदमीपार्टी, उत्तरप्रदेश