● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के सरसंघचालक मोहन मधुकर भागवत ने आज (३ जून) एक बहुत अच्छी बात कही है, ” हर मस्जिद मे शिवलिंग की खोज क्यों? अब आर० एस० एस० मन्दिरों को लेकर कोई आन्दोलन नहीं करनेवाला है। यह रोज़-रोज़ की मन्दिर-मस्जिद से देश पिछड़ रहा है। ‘ज्ञानवापी’ को लेकर ‘हिन्दू-मुसलमान’ का विषय नहीं बनाना चाहिए। हमे सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना है। हमे ‘विश्वगुरु’ बनना है।” उन्होंने ‘रामजन्मभूमि-आन्दोलन’ मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका पर भी प्रकारान्तर से खेद व्यक्त करते हुए कहा था,”राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने रामजन्मभूमि-आन्दोलन मे ज़रूर हिस्सा लिया था; लेकिन तब संघ ने अपनी मूल प्रवृत्ति के विपरीत जाकर वैसा किया था।”
मोहन भागवत ने आज नागपुर मे संघ-कार्यकर्त्ताओं को सम्बोधित करते हुए ये बातें कही हैं।
यदि मोहन भागवत अपने इस विचार को व्यवहार का रूप देते हैं तो निश्चित रूप से भारत मे जिस ‘मन्दिर-मस्जिद’ और ‘हिन्दू-मुसलमान’ का घृणित खेल खेला जा रहा है, उससे मुक्ति मिल सकती है और वयोवृद्ध भारत ऊर्जस्वित होकर अवरुद्ध प्रगतिपथ को प्रशस्त करने मे समर्थ सिद्ध हो सकता है।
इससे भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं के विचार और व्यवहार पर तुषारपात (‘तुषारापात’ अशुद्ध है।) हुआ है, जो सिर्फ़ ‘हिन्दू-मुसलमान’ और ‘मन्दिर-मस्जिद’ की नितान्त निकृष्ट राजनीति करते हुए, हमारे ‘महान् भारत’ को गर्हित ‘न्यू इण्डिया’ मे बदलकर अपनी कुत्सित नीति का प्रतिपादन करना चाहते हैं।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ३ जून, २०२२ ईसवी।)