तीसरे टी-20 क्रिकेट मैच मे भारत इंग्लैण्ड से पराजित

भारतीय क्रिकेट-प्रबन्धन-समिति और कप्तान ने प्रयोग की कुल्हाड़ी अपने ही पाँवों पर मारी!

 भारत-इंग्लैण्ड के मध्य आज (१० जुलाई) इंग्लैण्ड मे  खेले गये तीन मैचों की टी-20 क्रिकेट-शृंखला के तीसरे मैच मे इंग्लैण्ड ने भारत को १७ रनो से पराजित कर, भारत को ३-० से शृंखला जीतने के सपने को चकनाचूर कर दिया है, यद्यपि भारत इस शृंखला को को २-१ से जीत चुका है।

सूर्यकुमार यादव ने अत्यन्त प्रभावकारी बल्लेबाज़ी करते हुए ५५ गेंदों मे ११७ और श्रेयस अय्यर ने उनका विश्वसनीय साथ देते हुए, २३ गेंदों मे २८ रन बनाये थे, शेष स्वनामधन्य खिलाड़ी फिसड्डी साबित हुए। अब यहाँ से विराट कोहली का अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से पत्ता साफ़ हो जाना चाहिए; क्योंकि अब वे थक चुके हैं; न तो उनका स्वाभाविक खेल दिख रहा है और न ही उनके खेलने की तकनीक समझ मे आ रही है।
  
यहाँ भारतीय क्रिकेट-दल की दूषित खेलनीति सामने आयी है। जब इधर खेले गये मैचों मे लगातार इशान किशन, दीपक हुड्डा, हार्दिक पाण्ड्या, भुवनेश्वर कुमार तथा युजवेन्द्र चहल के प्रदर्शन शानदार थे तब उन्हें क्यों हटाया गया था? यदि भारत तीनो टी-20 क्रिकेट मैच जीत गया रहता तो एक महत्त्वपूर्ण इतिहास बन गया रहता। 
    
ऐसा हमने प्राय: देखा है कि जब भारतीय दल लगातार मैच जीतने लगता है तब क्रिकेट-प्रबन्धक और कप्तान 'घटिया' क़िस्म के 'प्रयोग' करने लगते हैं, जो ऐसा  संयोग बन जाता है, जो भारतीय क्रिकेट-प्रबन्धकों और कप्तान के लिए शर्मनाक स्थिति के रूप मे सामना आता है; परिणाम भारतीय दल की पराजय के रूप मे सामने आता है।
 
यदि हर्षल पटेल अपनी ही गेंद पर १२ रन के निजी स्कोर पर डेविड मलान का कैच नहीं छोड़े होते तो मैच-परिणाम भारत के पक्ष मे होता।

टॉस जीतने के बाद भी इंग्लैण्ड ने शानदार और जानदार बल्लेबाज़ी का प्रदर्शन करते हुए, २० ओवरों मे ७ विकेटों पर २१५ रन बना लिये थे; जवाब मे भारत ने २० ओवरों मे ९ विकेटों पर १९८ रन बना पाये थे। यदि एक छोर से सूर्यकुमार यादव और श्रेयस अय्यर ने शतकीय साझेदारी नहीं की होती तो भारत की बहुत ही बुरी हार हो जाती।

भारत की ओर से एक भी गेंदबाज़ असरकारक नहीं दिखा था, जिसका परिणाम भारत की 'पराजय' रहा।

● चित्र-विवरण– सूर्यकुमार यादव की मोहक बल्लेबाज़ी
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १० जुलाई, २०२२ ईसवी।)