मश्हूर गायक भूपिन्दर सिंह का शरीरान्त हुआ!

"ख़ुश रहो अहले वतन हम तो सफ़र करते हैं"

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

आज (१८ जुलाई) प्रख्यात गायक भूपिन्दर सिंह का बहुत समय से रोगग्रस्त रहने के कारण निधन हो गया। ८२ वर्षीय भूपिन्दर सिंह ने एक-से-बढकर-एक फ़िल्मी और ग़ैर-फ़िल्मी गीत, विशेषत: ग़ज़ल सिनेमा-जगत् और संगीतलोक के लिए गाये थे।

“कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता”, “नाम गुम जायेगा, चेहरा ये बदल जायेगा”, “होके मज़्बूर मुझे उसने बुलाया होगा”, “राहों पर नज़र रखना, होठों पर दुआ रखना, आ जाये कोई शायद दरवाज़ा खुला रखना।”
“किसी नज़र को तेरा इन्तिज़ार आज भी है”, “करोगे याद तो हर बात याद आयेगी”, “दरो दीवार पे हस्रत से नज़र करते हैं, खुश रहो अहले वतन हम तो सफ़र करते हैं”— ग़ज़लों की एक बहुत लम्बी सूची है, जिसे भूपिन्दर ने स्वर देकर स्वयं और उसके गीतकार को अमर बना दिया।

हम अपने ‘मुक्त मीडिया-परिवार’ की ओर से प्रख्यात गायक भूपिन्दर सिंह को अपनी शब्दांजलि अर्पित करते हैं।

शोहरत-याफ़्ता गीतकार गुलज़ार ने एक अवसर पर कहा था, “भूपिन्दर की आवाज़ ऐसी है, जैसे किसी पहाड़ी से टकरानेवाली बारिश की बूँदें, जो तन-मन को तरोताज़ा कर देती है और आत्मा तक सीधे पहुँचती है।”

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १८ जुलाई, २०२२ ईसवी।)