समाचार-चैनलों की ओर से ‘ग़ुलाम-वंश’ के पुरावृत्त का आरम्भ

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

‘मुक्त मीडिया’ का ‘आजका’ सम्पादकीय

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

● बाइकवाली, ट्रैक्टरवाली, जीपवाली चैनलवालियाँ।
● ऑटोवाला, ट्रकवाला चैनलवाले।

◆ सच तो यह है कि इन सभी का कोई स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं; बनियों की नौकरी जो कर रहे हैं। वे सभी कहीं-न-कहीं समाज की स्वस्थ गति-मति-रति को अवरुद्ध करते आ रहे हैं। बेशक, आकर्षण के केन्द्र मे स्वयं को बनाये रखना, उन सभी का ख़ालिस (विशुद्ध) पेशा बन चुका है।

◆ बेचारे सोचकर आये थे कि सीना तानकर लोकतन्त्र के पक्ष मे आवाज़ बलन्द (‘बुलन्द’ उपयुक्त है; किन्तु शुद्ध नहीं।) करेंगे; परन्तु “काजल की कोठरी” वाली स्टुडियो मे धकेल (‘ढकेल’ ग़लत है।) दिये गये हैं। बेशक, घुटन है; परन्तु जिस तरह से कूड़े-करकट, गन्दे नालों के पास बस्ती (स्लम एरिया) बसा कर लोग रहते हैं और वहाँ रहते-रहते, वे सभी बाशिन्दे (‘बाशिन्दे फ़ारसी-भाषा का शब्द है। ‘वाशिन्दे’ अशुद्ध है।) विषैला पानी, गन्दगी तथा बदबूभरे माहौल मे रहने के अभ्यस्त (जिसका अभ्यास किया गया हो। ‘अभ्यस्थ’ अशुद्ध है।) हो जाने के कारण उसी वातावरण/परिवेश/परिदृश्य/माहौल मे ढल जाते हैं, ठीक उसी प्रकार से हमारे समाचार-चैनल मे किसी भी स्तर पर काम करनेवालों का ‘आज का चरित्र’ है।

सभी समाचार-चैनलों के समस्त क्रीतदास (ख़रीदे गये ग़ुलाम) और संकेतदास (इशारों पर नाचनेवाले ग़ुलाम) हैं। आज का दौर ‘ग़ुलाम-वंश’ की इतिवृत्त/पुरावृत्त (पुरानी कथा) की पुनरावृत्त (फिर से दोहराना) कर रहा है। उन्हें जन-सरोकार/प्रयोजन (‘सरोकारों’ और ‘प्रयोजनों’ अशुद्ध हैं।) से कोई लेना-देना नहीं। यही कारण है कि ‘भारत’ का रूपान्तर ‘न्यू इण्डिया’ के नाम से कर दिया गया है और ‘भारतीय लोकतन्त्र’ के स्थान पर ‘न्यू इण्डिया के राजतन्त्र’ की स्थापना कर दी गयी है; मज़ाल (साहस) कि कोई अपने समाचार-चैनल से ‘सोहराबुद्दीन फ़र्जी मुठभेड़-काण्ड’, ‘जस्टिस लोया-हत्याकाण्ड’, ‘गोधरा-काण्ड’, ‘बिलकिस बानो-प्रकरण’, ‘पुलवामा-हमला’ आदिक को सप्रमाण सामने ला सके।

अब समय आ गया है कि ‘यूट्यूब’ पर अपनी पसन्द के समाचार-चैनलों को देखा जाये और टी० ह्वी० (टी. वी., टी० वी०, टी. ह्वी. अशुद्ध हैं।) के सभी समाचार-चैनलों के प्रति मोहभंग किया जाये।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २ दिसम्बर, २०२२ ईसवी।)