‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग’, प्रयागराज और ‘राष्ट्रभाषा प्रचार समिति’, वर्धा के संयुक्त तत्त्वावधान मे द्विदिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन गत दिवस बापू-कुटी, शान्तिभवन, वर्धा, नागपुर (महाराष्ट्र) के सभागार मे आयोजित किया गया। उद्घाघाटन-भाषक के रूप मे आन्तर्जालिक माध्यम से आयरलैण्ड मे भारतीय राजदूत डॉ० अखिलेश मिश्र ने कहा, “हिन्दी आज १०० करोड़ लोग बोलते और समझते हैं। इसकी व्याप्ति आज विश्व के बहुसंख्य देशों मे हो चुकी है। हम सबका सम्मिलित प्रयास होना चाहिए कि हमारी हिन्दी राष्ट्रभाषा बने।”

सचिव, साहित्य अकादमी, दिल्ली के० श्रीनिवास राव ने मुख्य अतिथि के रूप मे कहा, “हिन्दी हमारी नस-नस मे है। इसका उत्थान तीव्र गति मे हो रहा है। देश-विदेश मे इसका प्रचार-प्रसार प्रभावकारी ढंग से किया जा रहा है।”
आरम्भ मे, दीप-प्रज्वलन करके ७४वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया गया। हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमन्त्री विभूति मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया।
सम्मेलन और समिति के सभापति प्रो० सूर्यप्रसाद दीक्षित ने आभार-ज्ञापन करते हुए, हिन्दीभाषा की सत्ता और महत्ता पर विधिवत् प्रकाश डाला था।
दूसरे दिन आयोजित दो सत्रों के अन्तर्गत प्रथम सत्र मे मुम्बई विद्यापीठ मे पूर्व-हिन्दीविभागाध्यक्ष प्रो० रामजी तिवारी ने अध्यक्षता की। ‘हिन्दी-साहित्य की उपयोगिता और महत्ता’ विषय पर देश के विभिन्न राज्यों से आये हुए विषय-विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किये।
द्वितीय सत्र मे पुणे के प्रख्यात भाषाविद् डॉ० दामोदर खड़से ने अध्यक्षता करते हुए, कम्प्यूटर-तकनीकि मे हिन्दीभाषा की उपयोगिता और महत्ता पर अत्यन्त रोचक ढंग से ज्ञानवर्द्धन किया था। ‘हिन्दीभाषा और प्रौद्योगिकी’-विषयक व्याख्यान आरम्भ किया गया था, जिसमे कई वक्ताओं ने प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों मे हिन्दी-माध्यम मे शिक्षा-प्रशिक्षा करने पर बल दिया था।
भाषाविज्ञानी और समीक्षक, प्रयागराज के आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने विशिष्ट वक्ता के रूप मे बताया, “हमे सहज शब्दों मे विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों :― जीव, रसायन, भौतिकी, वनस्पति, कम्प्यूटर, इण्टरनेट, अभियान्त्रिकी, सैन्य, विधि, कृषि-पशुपालन, चिकित्सा, परमाणु, अन्तरिक्ष आदिक विषयों मे हिन्दी के ऐसे शब्दों के व्यवहार करने की आवश्यकता है, जिनसे अँगरेज़ी अथवा अन्य अभारतीय शब्दों का सभाव सार्थक रूप दिख सके। अब हमे नये सिरे से हिन्दी मे प्रौद्योगिकी-शब्दकोश लिखने की आवश्यकता है।”
वरिष्ठ पत्रकार डॉ० प्रभात ओझा ने कहा, “आज हिन्दी बाज़ार-माध्यम से फूली-फली है। संचारक्रान्ति के उद्भव और विकास मे इसकी महती भूमिका रही है।”
खुला अधिवेशन समारोह का आयोजन राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के मुक्तांगन मे किया गया था, जिसकी अध्यक्षता उत्तरप्रदेश भाषा संस्थान के पूर्व-कार्यकारी अध्यक्ष डॉ० कन्हैया सिंह ने की थी।
समापन-समारोह मे हिन्दी साहित्य सम्मेलन और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की ओर से हिन्दी-क्षेत्र मे उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए बड़ी संख्या मे हिन्दी-सेवियों का सम्मान किया गया। इसी अवसर पर हिन्दीभाषा और हिन्दी साहित्य सम्मेलन के संवर्धन के लिए पाँच प्रस्ताव पारित किये गये थे। इस अवसर पर हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमन्त्री विभूति मिश्र, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के प्रधानमन्त्री हेमचन्द्र वैद्य, सम्मेलन के प्रबन्धमन्त्री कुन्तक मिश्र आदिक गण्यमान्यजन मंच पर आसीन थे।
अधिवेशन के उद्घाटन और समापन-समारोह का प्रभावकारी संचालन सम्मेलन के सहायक मन्त्री श्यामकृष्ण पाण्डेय ने किया था।
इस अवसर पर स्नेहलता मिश्र, डॉ० किरणबाला पाण्डेय, मुरलीधर पाण्डेय, डॉ० ख़ुशीराम शर्मा, अशोक तिवारी, चंचलानी, सुरेखा शर्मा, नरेन्द्रदेव पाण्डेय, डॉ० रामकिशोर शर्मा, डॉ० हरिनारायण दुबे आदिक प्रबुद्धजन उपस्थित थे।